Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बड़गाईं जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष PMLA अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। 30 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। आरोप तय होने के बाद अब मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। अदालत में हेमंत सोरेन ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत और निराधार बताया है। उनके वकील संजीव सहाय ने भी कहा कि बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार किया है।
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8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल में 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के अनुसार, जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण में फर्जी दस्तावेजों और भूमि रिकॉर्ड के इस्तेमाल का आरोप है। इसी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में PMLA के तहत कार्रवाई चल रही है। मामले में हेमंत सोरेन समेत कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अन्य 16 आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं और सोरेन के खिलाफ आरोप तय होने के साथ यह प्रक्रिया उनके मामले में भी पूरी हो गई।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए हेमंत सोरेन
बुधवार की सुनवाई में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश हुए। उन्होंने मामले में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया और खुद को निर्दोष बताया। उनके वकील संजीव सहाय के मुताबिक, बचाव पक्ष ने मामले से संबंधित कानूनी प्रावधानों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का भी रुख किया है। वकील ने बताया कि हाईकोर्ट में संबंधित याचिका पर सुनवाई जारी है और आरोपों से इनकार किया गया है।
हाईकोर्ट में भी लंबित है याचिका
हेमंत सोरेन ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत की कार्यवाही को चुनौती दी है। उनका पक्ष रहा है कि जांच पूरी होने से पहले आरोप तय नहीं किए जाने चाहिए। हालांकि, 19 सितंबर को हाईकोर्ट ने विशेष PMLA अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद विशेष अदालत में कार्यवाही आगे बढ़ी और 30 सितंबर को आरोप तय कर दिए गए।
2024 में हुई थी गिरफ्तारी, बाद में मिली जमानत
इस मामले की जांच के दौरान ED ने 31 जनवरी 2024 को हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था। जून 2024 में उन्हें जमानत मिली थी। इसके बाद मामले से जुड़ी कानूनी कार्यवाही अलग-अलग अदालतों में जारी रही। अब विशेष PMLA अदालत में आरोप तय होने के बाद मामला ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ेगा। रिपोर्टों के मुताबिक, अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होगी।
आरोप तय होना दोषसिद्धि नहीं
कानूनी तौर पर अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को दोषी ठहरा दिया गया है। आरोप तय होने के बाद मुकदमे में अभियोजन और बचाव पक्ष के साक्ष्य तथा दलीलों की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इस मामले में भी हेमंत सोरेन ने आरोपों को गलत और निराधार बताते हुए अपना पक्ष रखा है।



