New Delhi: केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वहीं, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर संशोधित दरों की जानकारी दी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और आपूर्ति को संतुलित बनाए रखना है। नई दरों के अनुसार, डीजल के निर्यात पर अब 11.50 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 11 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगेगा। इससे पहले दोनों उत्पादों पर क्रमशः 8.50 रुपये और 10.50 रुपये प्रति लीटर शुल्क निर्धारित था। दूसरी ओर, पेट्रोल के निर्यात पर पहले लगने वाला 2.50 रुपये प्रति लीटर शुल्क अब शून्य कर दिया गया है।
पेट्रोल, डीजल और ATF की नई एक्सपोर्ट ड्यूटी
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क की नई दरें इस प्रकार हैं:
| पेट्रोलियम उत्पाद | पुरानी दर | नई दर |
|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹2.50/लीटर | शून्य |
| डीजल | ₹8.50/लीटर | ₹11.50/लीटर |
| ATF | ₹10.50/लीटर | ₹11/लीटर |
इस बदलाव में पेट्रोल को निर्यात शुल्क से पूरी छूट मिली है। वहीं, डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल पर 50 पैसे प्रति लीटर शुल्क बढ़ाया गया है। सरकार इन शुल्कों की समीक्षा हर 15 दिन में करती है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और घरेलू ईंधन आपूर्ति के हिसाब से दरों में बदलाव करना है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ऊर्जा क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े व्यवधानों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ रहा है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 113.10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। पिछले एक सप्ताह में इसमें 1.55 प्रतिशत, एक महीने में 15.71 प्रतिशत और तीन महीने में करीब 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर उन देशों पर अधिक पड़ता है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करते हैं। भारत भी कच्चे तेल के प्रमुख आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर देश की ऊर्जा आपूर्ति और आयात खर्च पर पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट में बाधा से बढ़ी तेल आपूर्ति की चिंता
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी चर्चा में है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके जरिए फारस की खाड़ी से दुनिया के अलग-अलग देशों तक कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, संघर्ष से पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता था। इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल आयात की लागत और आपूर्ति को लेकर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में भारत को वैकल्पिक मार्गों और दूसरे आपूर्तिकर्ता देशों पर निर्भरता बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
सरकार के फैसले से घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने की कोशिश
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की ऊंची कीमतों के कारण रिफाइनरी कंपनियों के लिए निर्यात आकर्षक हो सकता है। ऐसे में सरकार डीजल और ATF पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर घरेलू बाजार में इनकी उपलब्धता को प्राथमिकता देने की कोशिश कर रही है। पेट्रोल पर निर्यात शुल्क समाप्त करने से इसके निर्यात पर लगने वाला अतिरिक्त शुल्क हट जाएगा। वहीं, डीजल और विमान ईंधन पर बढ़ा शुल्क निर्यात की लागत को प्रभावित करेगा। कुल मिलाकर, पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क में यह बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने की सरकारी नीति का हिस्सा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल बदलाव होगा।




