Muzaffarpur: बिहार के मुजफ्फरपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। बेला थाना क्षेत्र में आरोप है कि एक युवती की तस्वीरों और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर आपत्तिजनक सामग्री तैयार की गई और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। आरोपितों ने कथित तौर पर यह सामग्री युवती के मंगेतर और उसके परिवार के सदस्यों को भी भेजी। इसके बाद युवती की तय शादी टूट गई। मामले में युवती के पिता की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
AI की मदद से तस्वीरों और वीडियो में छेड़छाड़ का आरोप
पुलिस को दिए गए आवेदन के अनुसार, वर्ष 2023 में युवती पीजी की पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान आरोपितों ने उसकी तस्वीरें और वीडियो हासिल किए थे। आरोप है कि बाद में AI और अन्य डिजिटल टूल्स की मदद से इन तस्वीरों और वीडियो में बदलाव कर आपत्तिजनक सामग्री तैयार की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि युवती की तस्वीर का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाई गई। इसके जरिए कथित आपत्तिजनक वीडियो और फर्जी चैट के स्क्रीनशॉट प्रसारित किए गए।
मंगेतर के परिवार को भी भेजी गई सामग्री
युवती के परिजनों का आरोप है कि कथित तौर पर बदनाम करने के उद्देश्य से तैयार की गई सामग्री को रिश्तेदारों और मंगेतर के परिवार के व्हाट्सएप नंबरों पर भी भेजा गया। इसके बाद मंगेतर के परिवार ने शादी से इनकार कर दिया। इस घटना से युवती और उसके परिवार को सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। तय रिश्ता टूटने के बाद युवती के पिता ने पुलिस से शिकायत कर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
युवती के पिता के आवेदन के आधार पर बेला थाना में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सभी आरोपी साहेबगंज थाना क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं और आपस में सगे भाई-बहन हैं। पुलिस ने सूचना और शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपितों की भूमिका और कथित डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।
साइबर सेल की मदद से हो रही जांच
मामले में पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। साइबर सेल की मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित सामग्री किसने तैयार की और उसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले में अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
AI के दुरुपयोग से बढ़ रहीं डिजिटल सुरक्षा की चुनौतियां
AI की मदद से किसी की तस्वीर या वीडियो में बदलाव कर भ्रामक सामग्री तैयार करना संबंधित व्यक्ति की निजता और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और पुलिस को समय पर सूचना देना महत्वपूर्ण होता है। मुजफ्फरपुर का यह मामला भी इसी तरह की डिजिटल सुरक्षा चुनौतियों को सामने लाता है। अब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित सामग्री किस तरह तैयार की गई और इसे फैलाने में किन लोगों की भूमिका रही।
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