Gandhinagar : राज्य के स्वास्थ्य कर्मचारियों के गांधीनगर में पिछले 11 दिनों से जारी हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। राज्य के आठ जिलों के 2100 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। वहीं करीब पांच हजार कर्मचारियों को शो-कॉज नोटिस दिया गया है। एक हजार से अधिक कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच का आदेश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सरकार के अल्टीमेटम के बाद कई कर्मचारी ड्यूटी पर लौट रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों की जो मांग थी, उसमें एक मांग ग्रेड-पे सुधारने की ऐसी है कि उसे बगैर समझे-विचार किए नहीं माना जा सकता है। इस विषय पर चर्चा के बाद ही हां या ना कहा जा सकता है। इन मामलों में सरकार सख्त है। कर्मचारी हड़ताल समेटने के बाद टेबल आए और चर्चा करें। इसके अलावा अन्य किसी तरह की बात का कोई मतलब नहीं है। इस तरह हड़ताल पर उतरना गलत है। उन्होंने कहा कि वे अपील करते हैं कि एक या दो दिन में डयूटी पर सभी लौट जाएं। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ को सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। वर्ष 2021 में भी कर्मचारियों ने हड़ताल की थी, तब उनके साथ चर्चा कर उनके कई मुद्दों का निराकरण लाया गया था। यानी चर्चा के जरिए ही किसी मामले का निवारण लाया जा सकता है।
दूसरी ओर कर्मचारी महासंघ के प्रमुख रणजीतसिंह के नेतृत्व में बुधवार रात्रि कर्मचारियों ने थाली बजाकर विरोध किया। उन्होंने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि हड़ताल के दौरान सरकार की ओर से दी गई सभी सजा रद्द कर दी जाएगी। दो दिन में सरकार समझौत के लिए आमंत्रण नहीं देती है तो राज्य भर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। महासंघ ने सभी कर्मचारियों को हड़ताल का समर्थन देने के लिए गांधीनगर आने की अपील की है। दूसरी ओर स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवा पर गहरा असर हो रहा है। सरकार ने दी एसेन्सियल सर्विसीज मेंटेनेंस एक्ट (एस्मा) लागू किया है। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य कर्मचारियों की मुख्य मांगों में मल्टीपपर्जन हेल्थवर्कर, फीमेल हेल्थवर्कर, मल्टीपल हेल्थ सुपरवाइजर, फीमेल हेल्थ सुपरवाइजर, तहसील मल्टीपल हेलथवर्कर, तहसील सुपरवाइजर और जिला स्तरीय स्वास्थ्य सुपरवाइजर कैडर का टेक्निकल कैडर में समावेश करने, ग्रेड पे सुधार करना आदि शामिल है।