Ranchi: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU) में रात के समय कार्यालय खोलकर काम करने और नियमों के उल्लंघन की शिकायत पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सख्त रुख अपनाया है। राज्यपाल सचिवालय ने ऐसे कार्यों में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। यह मामला विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश कुमार सिंह की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां जब्त किए जाने के बाद सामने आया है। वहीं, उच्च शिक्षा विभाग ने रजिस्ट्रार की नियुक्ति से जुड़ी वैकल्पिक व्यवस्था के अपने पुराने आदेश को वापस ले लिया है।
NPU में रात को कार्यालय खोलने की शिकायत
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को शिकायत मिली थी कि नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश कुमार सिंह और अन्य अधिकारी रात में कार्यालय खोलकर काम कर रहे हैं। राज्यपाल सचिवालय को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया कि कुलपति की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां जब्त होने के बाद भी विश्वविद्यालय में रात के समय कार्यालय खोलकर कामकाज किया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर नियमों के विपरीत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज और अधिकारियों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट के बाद जब्त हुई थीं कुलपति की शक्तियां
मिली जानकारी के अनुसार, राज्यपाल के आदेश पर नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में स्पेशल ऑडिट कराया गया था। ऑडिट रिपोर्ट में विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया और इन मामलों में कुलपति दिनेश कुमार सिंह की संलिप्तता की बात कही गई। इसके बाद राज्यपाल ने कुलपति की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां जब्त कर ली थीं। साथ ही, उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बर्खास्तगी से संबंधित प्रस्ताव सरकार के स्तर पर विचाराधीन है।
शक्तियां जब्त होने के दिन ही जारी हुआ था रजिस्ट्रार की नियुक्ति का आदेश
इस मामले में रजिस्ट्रार की नियुक्ति को लेकर भी विवाद सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, जिस दिन कुलपति की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां जब्त की गईं, उसी दिन उन्होंने डॉ. मृत्युंजय कुमार को विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार नियुक्त करने का आदेश जारी किया था। बताया गया कि यह आदेश रात में कार्यालय खोलकर जारी किया गया। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग के उस आदेश का आधार लिया गया था, जिसमें नियमित रजिस्ट्रार की नियुक्ति होने तक विश्वविद्यालय को अपने स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था करने की अनुमति दी गई थी।
उच्च शिक्षा विभाग ने वापस लिया अपना आदेश
रजिस्ट्रार की नियुक्ति से जुड़े घटनाक्रम के बीच उच्च शिक्षा विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था करने के संबंध में पहले जारी किए गए आदेश को वापस ले लिया है। इससे विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार की नियुक्ति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। अब इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर नजर रहेगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में राज्यपाल सचिवालय की चेतावनी के बाद किसी अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण सामने नहीं आया है।




