Garhwa: झारखंड के गढ़वा जिले में सरकारी स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक पर बड़ी कार्रवाई हुई है। मझिआंव प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय दलको के प्रभारी प्रधानाध्यापक आलोक कुमार को शराब के नशे में विद्यालय पहुंचने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद कराई गई जांच में आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए गए। इसके बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने निलंबन का आदेश जारी किया। इस कार्रवाई के साथ ही संबंधित शिक्षक के खिलाफ अलग से विभागीय कार्यवाही शुरू करने की भी तैयारी की गई है।
Also Read: JTET 2026: नकल करते पकड़े गए तो 5 लाख का जुर्माना, 986 केंद्रों पर होगी परीक्षा – PRATAH NEWZ
ग्रामीणों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मिली जानकारी के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 को ग्रामीणों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक आलोक कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि वह शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे थे। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जांच पदाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराई। जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने के बाद संबंधित शिक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
उपायुक्त के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा के निर्देश पर जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने निलंबन का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई झारखंड सेवा संहिता की धारा 99 और झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के प्रावधानों के तहत की गई है। निलंबन अवधि के दौरान आलोक कुमार का मुख्यालय क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी, नगर ऊंटारी का कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमित रूप से वहां अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इस अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता भी दिया जाएगा।
अलग से गठित होगा आरोप पत्र, चलेगी विभागीय जांच
निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आलोक कुमार के खिलाफ अलग से आरोप पत्र तैयार किया जाएगा। इसके बाद विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। जिला प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों और सेवा नियमों का पालन करने की हिदायत दी है। प्रशासन के अनुसार, सरकारी सेवा में अनुशासन, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा से जुड़ी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में भी अनुशासन और विद्यालयों में शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।




