Ranchi: चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ की आशंका को देखते हुए झारखंड सरकार ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। संभावित खतरे से निपटने के लिए राज्य के चार क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें तैनात करने का अनुरोध किया गया है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 30 अक्टूबर 2026 तक की संभावित आपातकालीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए एक टीम को मुख्यालय में रिजर्व रखने का भी अनुरोध किया गया है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य संभावित प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में देरी को रोकना है। संबंधित विभाग ने एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन को पत्र भेजकर आवश्यक तैयारियां करने का आग्रह किया है।
Cyclone Arnab: गृह विभाग ने NDRF से मांगी टीमें
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव राकेश कुमार ने पटना के बिहटा स्थित एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन के समादेष्टा को पत्र भेजा है। इसमें झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरत के अनुसार एनडीआरएफ की टीमें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। योजना के तहत राज्य को चार भौगोलिक क्षेत्रों में बांटकर राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी की जा रही है। इससे किसी इलाके में तूफान का असर बढ़ने या दूसरी आपात स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित क्षेत्र में बचाव दल को जल्दी भेजने में मदद मिल सकती है।
झारखंड के चार क्षेत्रों में होगी NDRF की तैनाती
आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के जिलों को चार क्षेत्रों में बांटा है। इन क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार एनडीआरएफ की टीमों की तैनाती का प्रस्ताव है।
1. मध्य झारखंड
इस क्षेत्र में रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और धनबाद जिले शामिल हैं।
2. दक्षिणी झारखंड
पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा और सरायकेला-खरसावां को इस क्षेत्र में रखा गया है।
3. उत्तर-पश्चिमी झारखंड
इस क्षेत्र में पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जिले शामिल हैं।
4. उत्तर-पूर्वी झारखंड
देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों को इस क्षेत्र में शामिल किया गया है।
मुख्यालय में रिजर्व रहेगी एक टीम
संभावित आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए एक एनडीआरएफ टीम को मुख्यालय में रिजर्व रखने का भी अनुरोध किया गया है। इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बचाव दल को बिना देरी प्रभावित इलाके में भेजना है। आपदा प्रबंधन विभाग ने पहले से तैयारी करने पर जोर दिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और बचाव दल के बीच बेहतर समन्वय बनाया जा सके। इससे प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने, जरूरतमंदों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और अन्य जरूरी बचाव कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिल सकती है।
तूफान को लेकर प्रशासन की तैयारी क्यों अहम?
चक्रवाती तूफान या उससे जुड़ी खराब मौसम की स्थिति में तेज हवाओं, भारी बारिश, जलजमाव और पेड़ गिरने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे हालात में बिजली, सड़क यातायात और सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए संभावित खतरे से पहले बचाव दलों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आपदा प्रबंधन का अहम हिस्सा है। हालांकि, एनडीआरएफ की तैनाती को लेकर विभाग की ओर से फिलहाल टीमों की वास्तविक तैनाती और उनकी संख्या का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए इसे संभावित आपात स्थिति से निपटने की तैयारी के तौर पर देखा जाना चाहिए। फिलहाल, झारखंड सरकार ने 30 अक्टूबर तक संभावित आपदा से निपटने के लिए तैयारी तेज करने का अनुरोध किया है। आगे की स्थिति मौसम संबंधी आधिकारिक पूर्वानुमान और प्रशासन के निर्देशों पर निर्भर करेगी।




