Hazaribagh: हजारीबाग शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और हजारीबाग नगर निगम को कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने 20 प्रमुख चौराहों पर Automated Traffic Light Management System को चार महीने के भीतर चालू करने और इसकी निगरानी के लिए अलग टीम गठित करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ हजारीबाग की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शहर में सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन के लिए अभी काफी काम किए जाने की जरूरत है।
20 प्रमुख चौराहों पर चार महीने में चालू होगा ट्रैफिक सिस्टम
हाईकोर्ट ने हजारीबाग नगर निगम के नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि 19 अगस्त 2026 के समझौते के तहत M/s Keyhole Design Private Limited के साथ Automated Traffic Light Management System का काम पूरा कर उसका ऑपरेशनल ट्रायल चार महीने के भीतर कराया जाए।
कोर्ट ने कम से कम 20 प्रमुख चौराहों को इस व्यवस्था में शामिल करने का निर्देश दिया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- डिस्ट्रिक्ट कोर्ट चौक
- कोर्रा चौक
- मटवारी चौक
- बरकागांव मोड़
- डीवीसी चौक
- झंडा चौक
- पुराना बस स्टैंड चौक
- नया बस स्टैंड चौक
- पंच मंदिर चौक
ट्रैफिक सिग्नल की निगरानी के लिए बनेगी तीन सदस्यीय टीम
कोर्ट ने ट्रैफिक सिग्नल के संचालन और रखरखाव के लिए तीन सदस्यीय मॉनिटरिंग टीम बनाने का निर्देश दिया है। इसमें नगर निगम के सहायक अभियंता स्तर से नीचे नहीं होने वाला अधिकारी, ट्रैफिक पुलिस का इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी और संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि शामिल होगा।
यह टीम रोजाना सिग्नल के डाउनटाइम का रिकॉर्ड रखेगी। किसी चौराहे का ट्रैफिक सिग्नल खराब होने पर तय समय सीमा के भीतर उसे दोबारा चालू कराना होगा।
CCTV और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती पर भी निर्देश
हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 से हजारीबाग में लगाए गए CCTV कैमरों की पूरी सूची तैयार करने को कहा है। इसके साथ ही 20 प्रमुख चौराहों पर पीक ऑवर में तैनात अधिकारियों की ड्यूटी चार्ट भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के साथ समन्वय कर आवश्यक ट्रेनिंग पूरी करने को कहा गया है।
पार्किंग, अतिक्रमण और भारी वाहनों पर भी होगी कार्रवाई
हजारीबाग की ट्रैफिक समस्या सिर्फ सिग्नल तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने भारी और व्यावसायिक वाहनों के परिचालन, पार्किंग व्यवस्था, फुटपाथ, वेंडिंग जोन और नो-वेंडिंग जोन को लेकर भी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
फुटपाथ, चौराहों, जेब्रा क्रॉसिंग और सड़क के हिस्सों पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए भी कार्रवाई करने को कहा गया है।
स्ट्रीट वेंडर्स को लेकर भी कोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि सड़क किनारे कारोबार करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को लेकर व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे उनका रोजगार और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था दोनों के बीच संतुलन बना रहे। उद्देश्य केवल वेंडर्स को हटाना नहीं, बल्कि स्ट्रीट वेंडिंग और पैदल चलने वाले लोगों के लिए सुरक्षित फुटपाथ के साथ मोटर वाहनों के आवागमन को व्यवस्थित करना होना चाहिए।
2021 से लंबित थी जनहित याचिका
हजारीबाग की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर यह जनहित याचिका वर्ष 2021 से हाईकोर्ट में लंबित थी। इससे पहले भी कोर्ट की अलग-अलग पीठों ने प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे।
जुलाई 2024 में हाईकोर्ट ने तत्कालीन अधिवक्ता प्रशांत पल्लव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर हजारीबाग का निरीक्षण करने और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा था। रिपोर्ट में शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक पुलिस की कमी, ऑटोमेटिक सिग्नल की अनुपस्थिति, CCTV के काम नहीं करने, बेतरतीब पार्किंग और ट्रैफिक नियमों के कमजोर पालन जैसे मुद्दे सामने आए थे।
कोर्ट ने कहा- ट्रैफिक व्यवस्था के लिए समन्वय जरूरी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि राज्य सरकार और नगर निगम की ओर से कुछ कदम उठाए गए हैं, लेकिन अभी प्रभावी क्रियान्वयन और लगातार निगरानी की जरूरत है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रैफिक सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े वैधानिक दायित्वों से कोई भी प्राधिकरण बच नहीं सकता।
खंडपीठ ने कहा कि स्वच्छ, सम्मानजनक और अपेक्षाकृत सुरक्षित शहरी जीवन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा है। वहीं, नागरिकों के आवागमन की स्वतंत्रता भी संवैधानिक संरक्षण के दायरे में आती है।
अदालत के निर्देशों के बाद अब हजारीबाग शहर में ट्रैफिक सिग्नल, CCTV निगरानी, पार्किंग, अतिक्रमण और पुलिस तैनाती से जुड़ी व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया और लागत को लेकर कोई आदेश नहीं दिया।



