Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची और खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर झुंड में घूम रहे कुत्तों से राहगीरों के साथ-साथ ग्रामीण भी चिंतित हैं। मवेशियों और पालतू जानवरों पर हमले तथा कुत्तों के काटने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आगामी त्योहारों के दौरान बाजारों में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।
मुरहू में आवारा कुत्तों के झुंड से बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मुरहू प्रखंड के कई इलाकों में आवारा कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं। कई बार ये कुत्ते राहगीरों और मवेशियों के पीछे दौड़ने लगते हैं। अचानक सामने आ जाने या झपटने से सड़क पर चलने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाइक सवारों के लिए भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़क पर अचानक कुत्तों का झुंड आ जाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के समय राहगीरों और मीडियाकर्मियों को भी आवारा कुत्तों के कारण दिक्कत होती है। मवेशियों और पालतू जानवरों पर हमलों की घटनाओं से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
रांची नगर निगम पर कुत्तों को जंगल में छोड़ने का आरोप
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के बीच स्थानीय लोगों ने रांची नगर निगम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नगर निगम द्वारा पकड़े गए आवारा कुत्तों को खूंटी के जंगलों में छोड़ दिया जाता है। लोगों का मानना है कि यदि ऐसा हो रहा है, तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्तों की संख्या बढ़ने की समस्या गंभीर हो सकती है। हालांकि, रांची नगर निगम द्वारा कुत्तों को खूंटी के जंगलों में छोड़े जाने के आरोप की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस मामले में संबंधित विभागों की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
मुरहू स्वास्थ्य केंद्र में पहुंच रहे कुत्ते के काटने के पीड़ित
मुरहू स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों के अनुसार, इन दिनों कुत्तों के काटने के मामले सामने आ रहे हैं और पीड़ित इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे हैं। लगातार ऐसे मामले सामने आने से स्थानीय लोगों में डर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्ते के काटने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक धोना चाहिए और बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज से बचाव के लिए जरूरी टीके लगवाना भी महत्वपूर्ण है।
डॉग रिकवरी वैन से अभियान चलाने की मांग
मुरहू के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से इस समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने मुरहू पंचायत समेत पूरे प्रखंड में विशेष अभियान चलाने की जरूरत बताई है। उनकी मांग है कि आवारा और आक्रामक कुत्तों को पकड़ने के लिए डॉग रिकवरी वैन की मदद ली जाए और उनके सुरक्षित प्रबंधन की व्यवस्था की जाए। साथ ही, संबंधित विभागों को ऐसी कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए, जिससे लोगों की सुरक्षा के साथ पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार भी सुनिश्चित हो सके।
त्योहारों से पहले कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में आवारा कुत्तों की समस्या को नजरअंदाज करना लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि समय रहते संवेदनशील इलाकों की पहचान कर उचित कदम उठाए जाएं। साथ ही, कुत्तों के काटने के मामलों में इलाज और टीकाकरण की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग मुरहू में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, स्थानीय लोग जल्द कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि आम नागरिकों, राहगीरों और मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।




