Ranchi: सदर अस्पताल रांची में बीमार युवक को ठंड से बचाने के लिए मां द्वारा चटाई से ढकने की तस्वीर सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लिया है। खबर प्रकाशित होने के बाद बुधवार को अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, हॉस्पिटल मैनेजर और फ्लोर मैनेजर्स के साथ बैठक की गई। बैठक में पूरे मामले की जानकारी ली गई और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के साथ संबंधित नर्स से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। अस्पताल प्रबंधन ने साफ किया कि मरीजों को जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराना कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
कंबल मिलने में हुई देरी, मां ने चटाई से ढका
बैठक में सामने आया कि बीमार युवक के लिए कंबल की मांग की गई थी। परिजनों का कहना है कि कंबल उपलब्ध कराने में देरी हुई। इसी दौरान युवक की मां ने उसे ठंड से बचाने के लिए चटाई से ढक दिया। मामले की तस्वीर सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने संबंधित कर्मचारियों से घटना के बारे में जानकारी ली। अब यह पता लगाया जा रहा है कि कंबल उपलब्ध कराने में देरी क्यों हुई और उस समय ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की क्या भूमिका थी।
मरीजों की सुविधा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
अस्पताल में हुई बैठक के दौरान कर्मचारियों को मरीजों और उनके परिजनों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने का निर्देश दिया गया। प्रबंधन ने कहा कि मरीजों की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। खास तौर पर ठंड, दवा, बेड, कंबल और नर्सिंग सहायता जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। अस्पताल प्रशासन ने कर्मचारियों से कहा कि ऐसी स्थिति दोबारा सामने नहीं आनी चाहिए।
वार्डों का औचक निरीक्षण करेंगे उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. विमलेश सिंह ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जाएगी। वह किसी भी समय वार्ड और अस्पताल के दूसरे हिस्सों का निरीक्षण कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान मरीजों की सुविधा या अस्पताल की व्यवस्था में कमी पाई गई तो संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अस्पतालों की 24 घंटे ऑनलाइन निगरानी की तैयारी
इधर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सरकारी अस्पतालों की निगरानी को लेकर नई व्यवस्था तैयार करने की बात कही है। उनका कहना है कि अस्पतालों में सेवाओं और व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखने के लिए नियमित विजिट प्लान बनाया जाएगा। इसके अलावा अस्पतालों में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों को अस्पतालों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों की सुविधाओं, चिकित्सा सेवाओं और अस्पताल की व्यवस्थाओं में आने वाली कमियों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करना है।
मंत्री बोले- एक घटना से पूरे सिस्टम पर सवाल नहीं
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में बेहतर इलाज और सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। अस्पतालों को नागरिक सुविधाओं में सुधार के लिए विशेष पैकेज भी दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक घटना से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। हालांकि, ऐसी घटनाओं से सबक लेकर व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जरूरत है। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की सामूहिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
नर्सिंग कॉलिंग सिस्टम की खराबी भी बनी परेशानी
सदर अस्पताल में मरीजों के लिए एक और बड़ी समस्या नर्सिंग कॉलिंग सिस्टम की खराब स्थिति से जुड़ी है। कई वार्डों में कॉलिंग बेल, स्विच और दूसरे उपकरणों के काम नहीं करने की शिकायत सामने आती रही है। ऐसे में मरीजों या उनके परिजनों को नर्सिंग स्टेशन तक जाकर कर्मचारियों को बुलाना पड़ता है। गंभीर मरीजों के मामले में यह परेशानी जोखिम बढ़ा सकती है। रात के समय स्थिति और मुश्किल हो जाती है। बताया जा रहा है कि कंबल उपलब्ध कराने में हुई देरी के पीछे नर्सिंग कॉलिंग सिस्टम की समस्या भी एक वजह हो सकती है।
सभी वार्डों में सिस्टम की जांच जरूरी
अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सभी वार्डों में नर्सिंग कॉलिंग सिस्टम की नियमित जांच जरूरी है। खराब उपकरणों की पहचान कर उन्हें जल्द ठीक कराया जाना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों और उनके परिजनों को तत्काल नर्सिंग स्टाफ की सहायता मिल सके। सदर अस्पताल की यह घटना केवल एक कर्मचारी की लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और अस्पताल की निगरानी व्यवस्था की भी परीक्षा है। अब देखना होगा कि जांच के बाद प्रबंधन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।




