Ranchi : झारखंड में अवैध शराब का कारोबार तेजी से फैल रहा है और लगातार छापेमारी के बावजूद इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। कई जिलों में कच्ची स्प्रिट और महुआ से देसी शराब बनाने का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है। खासकर सीमावर्ती इलाकों से अवैध शराब की बड़ी खेप बिहार, जहां शराबबंदी लागू है, वहां तक पहुंचाई जा रही है।
सीमावर्ती जिले बने तस्करी के हॉटस्पॉट
जानकारी के अनुसार झारखंड के कई जिले अवैध शराब के उत्पादन और तस्करी के मुख्य केंद्र बन चुके हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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पलामू
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गढ़वा
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लातेहार
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हजारीबाग
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गिरिडीह
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धनबाद
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बोकारो
इन जिलों के जंगलों और ग्रामीण इलाकों में गुप्त भट्ठियों में महुआ और केमिकल मिलाकर शराब तैयार की जाती है। बाद में इसे छोटे कंटेनरों में भरकर बिहार भेज दिया जाता है।
तस्करों के नए-नए तरीके
तस्कर शराब की खेप पहुंचाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं।
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बाइक और ऑटो से छोटी खेप भेजना
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कार और ट्रक से बड़ी मात्रा में शराब ले जाना
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सब्जी और फल की गाड़ियों में शराब छिपाकर तस्करी
इन तरीकों के कारण कई बार पुलिस की नजर से तस्कर बच निकलते हैं।
कार्रवाई के बावजूद जारी कारोबार
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग लगातार छापेमारी कर रहा है। पिछले एक साल में हजारों लीटर अवैध शराब नष्ट की गई और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। कई स्थानों पर अवैध शराब भट्ठियों को भी ध्वस्त किया गया।
इसके बावजूद अवैध शराब का धंधा पूरी तरह बंद नहीं हो पा रहा है।
कुछ दिन रुकता है धंधा, फिर शुरू
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां छापेमारी होती है वहां कुछ दिनों तक शराब बनना बंद हो जाता है, लेकिन थोड़े समय बाद फिर वही गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। इससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
संगठित गिरोह का नेटवर्क
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध शराब के इस कारोबार के पीछे संगठित गिरोह सक्रिय हैं। इसमें शराब बनाने वाले, सप्लाई करने वाले और खरीददारों का पूरा नेटवर्क शामिल होता है। अक्सर छोटे स्तर के लोगों को पकड़ लिया जाता है, लेकिन मुख्य सरगना तक पुलिस नहीं पहुंच पाती।
सीमावर्ती इलाकों में निगरानी की कमी
झारखंड और बिहार की सीमा कई जगहों पर खुली और जंगलों से घिरी है। इसका फायदा उठाकर तस्कर रात के समय शराब की खेप आसानी से सीमा पार करा देते हैं। कई बार पुलिस को सूचना मिलने के बाद भी तस्कर रास्ता बदलकर निकल जाते हैं।
स्वास्थ्य के लिए भी खतरा
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अवैध शराब केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या भी है। कच्ची शराब में खतरनाक केमिकल मिलाए जाते हैं, जिससे कई बार जहरीली शराब पीने से मौत तक हो जाती है।
समाधान के लिए बहुस्तरीय रणनीति जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या से निपटने के लिए केवल छापेमारी काफी नहीं है। इसके लिए जरूरी है:
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शराब बनाने वाले इलाकों की पहचान और कड़ी निगरानी
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तस्करी नेटवर्क के सरगनाओं तक कार्रवाई
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झारखंड और बिहार पुलिस के बीच बेहतर समन्वय
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ग्रामीण इलाकों में जागरूकता और वैकल्पिक रोजगार
होली से पहले चला विशेष अभियान
होली को देखते हुए मार्च में राज्यभर में विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान 2500 लीटर से अधिक अवैध शराब और हजारों लीटर स्प्रिट बरामद की गई तथा 70 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।
2025 में 9370 मामले दर्ज
उत्पाद विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में अवैध शराब के खिलाफ 9370 मामले दर्ज किए गए और 513 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही सरकार ने करीब 22 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व भी वसूला।
हाल के प्रमुख मामले
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27 जून 2025: सरायकेला-खरसावां में 945 लीटर विदेशी शराब जब्त
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2 नवंबर 2025: बोकारो में अंतरराज्यीय शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़
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1 दिसंबर 2025: जामताड़ा में 45 लाख की नकली शराब जब्त
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15 जनवरी 2026: पलामू में महुआ शराब की अवैध भट्ठी ध्वस्त
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28 जनवरी 2026: हजारीबाग में कार से 20 पेटी विदेशी शराब बरामद
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10 फरवरी 2026: गढ़वा में 200 लीटर अवैध शराब बरामद
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18 फरवरी 2026: गिरिडीह में 300 लीटर महुआ शराब जब्त
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22 फरवरी 2026: लातेहार में अवैध शराब भट्ठी नष्ट
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3 मार्च 2026: सरायकेला में तीन अवैध भट्ठियां ध्वस्त
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5 मार्च 2026: धनबाद में मिनी शराब फैक्ट्री का खुलासा
अवैध शराब की यह समस्या न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है।

