झारखंड में डायबिटीज के मरीजों की संख्या में बड़ा उछाल, एक साल में 1.45 लाख से अधिक की पुष्टि

झारखंड में डायबिटीज के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वर्ष 2025-26 में जांच के दौरान 1.45 लाख से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित मिले।
झारखंड में डायबिटीज के मरीजों की संख्या में बड़ा उछाल
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Ranchi: झारखंड में डायबिटीज यानी मधुमेह को लेकर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) झारखंड के एनसीडी कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में जांच के दौरान 1,45,548 लोगों में डायबिटीज की पुष्टि हुई। इसके मुकाबले वर्ष 2024-25 में 61,017 मरीजों की पहचान हुई थी। यानी एक साल के भीतर सरकारी जांच अभियान में सामने आए मरीजों की संख्या दोगुने से भी अधिक हो गई। हालांकि, इस बढ़ोतरी को पूरे राज्य में डायबिटीज के मरीजों की संख्या में वास्तविक वृद्धि मानना सही नहीं होगा। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले वर्ष की तुलना में अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की है। ऐसे में जांच का बढ़ता दायरा भी अधिक मरीजों की पहचान होने की एक वजह हो सकता है।

झारखंड में डायबिटीज की जांच का दायरा बढ़ा

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में गैर-संचारी रोगों की पहचान के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग की गई।

  • वर्ष 2024-25: 30,45,750 लोगों की जांच हुई और 61,017 लोगों में डायबिटीज की पुष्टि हुई।
  • वर्ष 2025-26: 40,07,710 लोगों की स्क्रीनिंग की गई और 1,45,548 लोग डायबिटीज से पीड़ित मिले।

इस तरह एक साल में जांच कराने वाले लोगों की संख्या में करीब 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, जांच में डायबिटीज की पुष्टि होने वाले लोगों का अनुपात भी बढ़ा है।

जांच कराने वालों में 3.63 प्रतिशत लोग डायबिटीज से पीड़ित

आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में जांच कराने वाले लोगों में लगभग 2 प्रतिशत में डायबिटीज की पुष्टि हुई थी। वर्ष 2025-26 में यह अनुपात बढ़कर 3.63 प्रतिशत हो गया। यह आंकड़ा बताता है कि सरकारी स्क्रीनिंग अभियान में मधुमेह के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि, जांच के लिए पहुंचने वाले लोगों का चयन, उनकी उम्र और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी इन आंकड़ों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन परिणामों के आधार पर पूरे झारखंड में डायबिटीज की वास्तविक दर का आकलन नहीं किया जा सकता।

प्री-डायबिटीज के मामले भी बढ़ा सकते हैं चिंता

झारखंड में डायबिटीज के साथ प्री-डायबिटीज की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत है। द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी में प्रकाशित ICMR-INDIAB अध्ययन के अनुसार, राज्य में डायबिटीज की व्यापकता करीब 7.2 प्रतिशत और प्री-डायबिटीज की व्यापकता 9.5 प्रतिशत आंकी गई थी। प्री-डायबिटीज ऐसी स्थिति है, जिसमें खून में शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन वह डायबिटीज की निर्धारित सीमा तक नहीं पहुंचता। इस स्तर पर समय रहते जीवनशैली में जरूरी बदलाव और चिकित्सकीय सलाह लेने से भविष्य में डायबिटीज का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त दवाओं की सुविधा

एनसीडी कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. लाल माझी के अनुसार, राज्य में जांच अभियान का दायरा बढ़ने से डायबिटीज के मरीजों की पहचान करने में मदद मिल रही है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को नियमित इलाज के साथ मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में डायबिटीज तथा हाई ब्लड प्रेशर की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन बीमारियों की समय पर पहचान होने से मरीजों को इलाज शुरू करने और बीमारी को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है।

डायबिटीज से बचाव के लिए क्या जरूरी है?

डायबिटीज लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रह सकती है। इसलिए केवल लक्षण दिखाई देने पर ही जांच कराने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित स्क्रीनिंग कराना उपयोगी है।

मधुमेह के जोखिम को कम करने और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है:

  • संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर की जांच कराएं।
  • डायबिटीज की पुष्टि होने पर इलाज में लापरवाही न करें।
  • दवाएं डॉक्टर के निर्देश के अनुसार लें और नियमित फॉलो-अप कराएं।

मरीजों की पहचान के साथ इलाज जारी रखना भी चुनौती

झारखंड में डायबिटीज की स्क्रीनिंग बढ़ना स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे ऐसे लोगों की भी पहचान हो सकती है, जिन्हें अपनी बीमारी के बारे में पहले जानकारी नहीं थी। लेकिन केवल जांच से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरी है कि जिन लोगों में डायबिटीज की पुष्टि हुई है, उन्हें समय पर इलाज, नियमित दवाएं और बीमारी के प्रबंधन से जुड़ी जानकारी मिलती रहे। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच और उपचार की निरंतर उपलब्धता मधुमेह के बढ़ते बोझ को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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