Ranchi: झारखंड में समग्र शिक्षा अभियान के तहत काम करने वाले प्रखंड साधन सेवी (BRP) और संकुल साधन सेवी (CRP) के लिए अहम खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने इन कर्मचारियों की सेवा नियमित करने और समान काम के बदले समान वेतन देने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
15 से 20 साल से काम कर रहे कर्मचारियों ने उठाई मांग
हाईकोर्ट में यह याचिका बहादुर महतो और अन्य की ओर से दाखिल की गई थी। सोमवार को न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि बीआरपी और सीआरपी वर्ष 2004 के बाद से सर्व शिक्षा अभियान के तहत काम कर रहे हैं। बाद में यह व्यवस्था समग्र शिक्षा अभियान का हिस्सा बन गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में कम मानदेय मिलता है।
नियमित शिक्षकों जैसी जिम्मेदारियां निभाने का दावा
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बीआरपी और सीआरपी से शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ मध्याह्न भोजन योजना की निगरानी और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभाई जाती हैं। उनका तर्क है कि लंबे समय से काम करने और जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें नियमित सेवा का लाभ नहीं मिला है। इसी आधार पर कर्मचारियों ने सेवा नियमित करने और वेतनमान निर्धारित करने की मांग की है।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
मामले में सभी पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है। अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। हालांकि, अभी नियमितीकरण या समान वेतन को लेकर कोई अंतिम आदेश जारी होने की जानकारी नहीं है। अब संबंधित कर्मचारियों की नजर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर रहेगी। अदालत का निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उनकी मांगों पर क्या आदेश दिया जाता है।
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