Chakradharpur: जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारी देवेंद्र माझी के बलिदान दिवस पर बुधवार को चक्रधरपुर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। पंप रोड स्थित सांसद जोबा माझी के आवास परिसर में बने समाधि स्थल पर उनके परिजनों, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेताओं और समर्थकों ने पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस मौके पर सांसद जोबा माझी और विधायक जगत माझी समेत परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे।
समाधि स्थल पर परिजनों और समर्थकों ने किया नमन
देवेंद्र माझी के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सांसद जोबा माझी ने समाधि स्थल पर पुष्पमाला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उनके साथ विधायक जगत माझी और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में झामुमो के जिला अध्यक्ष सोनाराम देवगम, जिला सचिव राहुल आदित्य, प्रदीप अग्रवाल, लखीराम हेम्ब्रम, कालीपद सोरेन, विशु हेम्ब्रम, भूकतु मार्डी, चंदन होनहागा और दिनेश जेना सहित कई नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके अलावा कालिया जामुदा, बुधराम उरांव, पच्चू बेसरा, फैज अहमद, लालू उरांव, प्रदीप महतो, विश्वनाथ बाड़ा और किशोर दास समेत अन्य समर्थकों ने भी समाधि स्थल पर फूल-माला चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में परिवार की पुत्रवधू सहित अन्य स्वजन भी उपस्थित रहे।
जल, जंगल और जमीन के आंदोलन से जुड़ी है देवेंद्र माझी की पहचान
देवेंद्र माझी को जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले प्रमुख आंदोलनकारियों में याद किया जाता है। उनके बलिदान दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के जरिए परिजनों और समर्थकों ने उनके संघर्ष और योगदान को स्मरण किया। झारखंड में जल, जंगल और जमीन का मुद्दा आदिवासी समाज के अधिकारों, आजीविका और स्थानीय संसाधनों से जुड़ा रहा है। ऐसे में देवेंद्र माझी की स्मृति में होने वाले कार्यक्रम उनके आंदोलन और विचारों को याद करने का अवसर भी बनते हैं।
गोइलकेरा के कार्यक्रम में शामिल होने रवाना हुए जोबा माझी और जगत माझी
चक्रधरपुर स्थित आवास परिसर में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सांसद जोबा माझी और विधायक जगत माझी समर्थकों के साथ गोइलकेरा के लिए रवाना हुए। दोनों को वहां आयोजित देवेंद्र माझी के बलिदान दिवस के कार्यक्रम में शामिल होना था। इस तरह चक्रधरपुर में समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यक्रमों का सिलसिला गोइलकेरा में भी जारी रहा।


