Ranchi: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा-2023 में कथित पेपर लीक और फर्जीवाड़े की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की परतें खुलती जा रही हैं। CID की पड़ताल में प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसी से जुड़े कर्मचारी समीर कुमार की भूमिका सामने आई है। जांच के मुताबिक, परीक्षा से पहले ही समीर को प्रश्नपत्र और उनके उत्तरों की जानकारी हो गई थी। आरोप है कि इसी अंदरूनी पहुंच का इस्तेमाल पेपर लीक से जुड़े सिंडिकेट ने किया। मामले की जांच अब सिर्फ प्रश्नपत्र बाहर पहुंचाने तक सीमित नहीं है। CID कथित तौर पर पेपर लीक से मिले पैसों, कोचिंग संस्थानों, परीक्षा एजेंसियों और आरोपियों के बैंक खातों के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।
प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसी में काम करता था समीर
JSSC CGL परीक्षा के प्रश्नपत्र की डिजाइनिंग, प्रिंटिंग, जंबलिंग और OMR शीट तैयार करने जैसे बेहद संवेदनशील काम की जिम्मेदारी मानेसर स्थित ICN India को दी गई थी। CID की जांच के दायरे में आया समीर कुमार इसी एजेंसी से जुड़ा हुआ था। प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया तक उसकी सीधी पहुंच होने के कारण उसके पास परीक्षा से पहले ही सवालों और उत्तरों से जुड़ी अहम जानकारी मौजूद थी। जांच में सामने आया है कि समीर ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र के सवाल-जवाब याद कर लिए थे। इसके बाद उसकी भूमिका महज एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह पेपर लीक नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बन गया।
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अंदरूनी जानकारी बनी पेपर लीक का जरिया
JSSC CGL Scam की जांच में सबसे अहम बिंदु यही है कि परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति तक प्रश्नपत्र की जानकारी कैसे पहुंची और फिर वह जानकारी कथित तौर पर सिंडिकेट तक कैसे गई। CID अब इसी पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि समीर ने प्रश्नपत्र की जानकारी किन लोगों तक पहुंचाई और इसके बदले किसी तरह का आर्थिक लेन-देन हुआ या नहीं।
दिल्ली से रांची तक हवाई यात्रा का भी कनेक्शन
जांच के दौरान समीर और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ अन्य लोगों की दिल्ली से रांची हवाई यात्रा भी जांच के घेरे में आई है। बताया जा रहा है कि इन यात्राओं से जुड़े टिकट और खर्च का इंतजाम सह-अभियुक्त सोमांश प्रकाश के माध्यम से किया गया था। CID अब यह भी देख रही है कि यह यात्रा महज परीक्षा संबंधी गतिविधि थी या इसके पीछे पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ी कोई अन्य कड़ी थी।
रांची के दो कोचिंग संस्थान भी जांच के दायरे में
पेपर लीक मामले में CID की वित्तीय जांच का दायरा रांची के दो कोचिंग संस्थानों तक पहुंच गया है। इनमें पतंजलि IAS एकेडमी और शिवांगन की पाठशाला शामिल हैं। जांच के अनुसार, इन संस्थानों से अभ्यर्थियों को कथित तौर पर परीक्षा में पास कराने के नाम पर पैसे लेने और व्यवस्था कराने की बात सामने आई है। दोनों संस्थानों के संचालक रवि कुमार और संजीत कुमार पहले ही गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं।
बैंक खातों की जांच से खुल सकती है पैसों की पूरी कड़ी
CID अब दोनों कोचिंग संचालकों के बैंक खातों और वित्तीय गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है। इसके तहत आय-व्यय, ऑडिट रिकॉर्ड और अलग-अलग खातों में हुए लेन-देन को खंगाला जा रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से लिया गया पैसा किन लोगों तक पहुंचा और पेपर लीक नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच रकम का बंटवारा किस तरह हुआ।
समीर के खातों में मिले संदिग्ध UPI ट्रांजैक्शन
वित्तीय जांच के दौरान समीर के बैंक खातों में भी संदिग्ध लेन-देन सामने आने की बात कही गई है। जांच में उसके खातों में 98 हजार रुपये और 30 हजार रुपये के UPI ट्रांसफर का उल्लेख किया गया है। CID इन रकम के स्रोत और अंतिम लाभार्थियों की जानकारी जुटा रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन ट्रांजैक्शन का संबंध कथित पेपर लीक नेटवर्क से था या नहीं।
कथित फर्जीवाड़े के जरिए ASO पद पर हुआ चयन
जांच में समीर की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रश्नपत्र की प्रक्रिया से जुड़े होने के बावजूद उसने कथित तौर पर परीक्षा में हिस्सा लिया और सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) के पद पर चयनित होने में सफल रहा। यही बिंदु जांच एजेंसी के लिए अहम है कि प्रश्नपत्र तक कथित पहुंच रखने वाले व्यक्ति ने परीक्षा में किस तरह भाग लिया और उसके चयन तक पूरी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी।
परीक्षा एजेंसियों की भूमिका भी CID के रडार पर
JSSC CGL Scam की जांच अब कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। CID कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसियों TDPL और Binsys Technology की भूमिका और कोचिंग संस्थानों के साथ उनके संभावित संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।
फिलहाल जांच का फोकस तीन प्रमुख पहलुओं पर है:
- प्रश्नपत्र की गोपनीय जानकारी बाहर कैसे पहुंची।
- पेपर लीक के बाद कथित तौर पर पैसे का लेन-देन कैसे हुआ।
- कोचिंग संस्थानों, परीक्षा एजेंसियों और आरोपियों के बीच क्या कनेक्शन था।
अंतिम कड़ी तक पहुंचने में जुटी CID
JSSC CGL परीक्षा-2023 से जुड़े इस मामले में जांच अब पेपर लीक से आगे बढ़कर पूरे कथित सिंडिकेट और उसके वित्तीय नेटवर्क पर केंद्रित हो गई है। समीर के बैंक खातों में मिले संदिग्ध ट्रांजैक्शन, रांची के कोचिंग संस्थानों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका को जोड़कर CID पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट करने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रश्नपत्र की कथित अंदरूनी जानकारी किन-किन लोगों तक पहुंची, इसके बदले कितना पैसा लिया गया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग सीधे तौर पर शामिल थे।




