लो वोल्टेज से मिलेगी राहत! ₹12 हजार करोड़ से बदलेंगे जर्जर तार, पोल और ट्रांसफार्मर

बिहार में लो वोल्टेज की समस्या दूर करने के लिए ₹12 हजार करोड़ की योजना तैयार है। जर्जर तार, पोल और 12 हजार ट्रांसफार्मर बदलने का प्रस्ताव है।
लो वोल्टेज से मिलेगी राहत
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Patna: बिहार में लो वोल्टेज और बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए बड़ी योजना तैयार की गई है। राज्य में करीब 12 हजार करोड़ रुपये खर्च कर पुराने बिजली के तार, जर्जर पोल और कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर बदले जाएंगे। इस योजना से लगभग सवा दो करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, योजना को लागू करने से पहले कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी।

बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए बनेगी कार्ययोजना

ऊर्जा विभाग ने राज्य में बिजली नेटवर्क को मजबूत करने के लिए करीब 12 हजार करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इसे जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष भेजने की तैयारी है। योजना के लिए बैंकों से कर्ज लेने पर भी विचार किया जा रहा है। विभाग को लंबे समय से जर्जर बिजली तारों, पोल गिरने और ट्रांसफार्मर जलने की शिकायतें मिल रही थीं। इन समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा था।

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बिजली के तारों और ट्रांसफार्मर पर क्यों बढ़ा दबाव?

पिछले एक दशक में बिहार में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2015-16 के बाद उपभोक्ताओं की संख्या दोगुनी से अधिक होने के कारण पुराने बिजली नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब एसी, कूलर और दूसरे बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे बिजली की खपत बढ़ने के साथ तारों और ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। इसी समस्या को देखते हुए कम क्षमता वाले तारों की जगह उच्च क्षमता वाले तार लगाए जाएंगे। बिजली की खपत के अनुसार ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और पुराने उपकरणों को बदलने की भी योजना है। ऊर्जा विशेषज्ञ एसके सिंह के अनुसार, बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तारों और ट्रांसफार्मरों के साथ पावर सबस्टेशन तथा ग्रिड की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान देना जरूरी है।

₹12 हजार करोड़ की योजना में कहां कितना खर्च होगा?

प्रस्तावित योजना के तहत बिजली नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों को दुरुस्त करने के लिए राशि निर्धारित की गई है।

काम का विवरण प्रस्तावित खर्च
1.18 लाख किलोमीटर पोल और केबल के तार ₹8,465 करोड़
बांस-बल्ले पर लगे 33,698 किलोमीटर तार ₹2,262 करोड़
12 हजार ट्रांसफार्मर लगाने या बदलने का काम ₹370 करोड़

इन कार्यों के जरिए बिजली वितरण नेटवर्क को अधिक मजबूत बनाने और पुरानी व्यवस्था की कमियों को दूर करने का लक्ष्य है।

उत्तर और दक्षिण बिहार में कैसे बंटेगी राशि?

योजना के तहत उत्तर और दक्षिण बिहार की बिजली वितरण कंपनियों के क्षेत्रों में अलग-अलग राशि खर्च करने का प्रस्ताव है।

  • उत्तर बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी: 21 जिलों में ₹6,066 करोड़ खर्च करने की योजना।
  • दक्षिण बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी: 17 जिलों में ₹5,031 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव।

इस तरह दोनों वितरण कंपनियों के अंतर्गत आने वाले कुल 38 जिलों में बिजली नेटवर्क को बेहतर बनाने की तैयारी है।

बिजली उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?

योजना लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को कई तरह की राहत मिलने की उम्मीद है।

  • लो वोल्टेज की समस्या कम हो सकती है।
  • ट्रांसफार्मर पर क्षमता से अधिक भार पड़ने की समस्या घट सकती है।
  • जर्जर तार टूटने और पोल गिरने की घटनाओं में कमी आ सकती है।
  • बिजली आपूर्ति अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।
  • तकनीकी खराबियों और बिजली संबंधी दुर्घटनाओं का जोखिम कम हो सकता है।

हालांकि, इन लाभों का वास्तविक असर योजना के लागू होने और काम पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी योजना

बिहार में बिजली उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या और खपत को देखते हुए पुराने नेटवर्क का आधुनिकीकरण जरूरी हो गया है। प्रस्तावित 12 हजार करोड़ रुपये की योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है। फिलहाल योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलना बाकी है। स्वीकृति, वित्तीय व्यवस्था और काम शुरू होने की समयसीमा स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चलेगा कि उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज से राहत कब तक मिल सकेगी।

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