New Delhi: चर्चित लैंड फॉर जॉब्स मनी लॉन्ड्रिंग केस में 30 सितंबर को होने वाली सुनवाई के बाद अब मामले की अगली कार्यवाही 14 और 15 अक्टूबर को होगी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले में आरोप तय करने को लेकर दलीलें आगे सुनी जाएंगी। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, मामले की सुनवाई नए न्यायाधीश प्रशांत कुमार के समक्ष आगे बढ़ेगी। यह मामला 2004 से 2009 के बीच रेलवे में ग्रुप-डी नियुक्तियों के बदले जमीन लिए जाने के आरोपों से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने CBI की प्राथमिकी को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच की है। ED ने जनवरी 2024 में पहली अभियोजन शिकायत और अगस्त 2024 में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की थी।
क्या है Land For Jobs Case?
CBI की जांच में आरोप लगाया गया कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल के दौरान रेलवे में कुछ ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिवारों से जमीन ली गई। ED ने इसी मामले से जुड़े कथित लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग के नजरिए से जांचा। एजेंसी के अनुसार, कुछ जमीनें कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर लालू यादव के परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम की गई थीं।
ED ने जांच में क्या कार्रवाई की?
ED के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, एजेंसी ने मार्च 2023 में तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान करीब 1 करोड़ रुपये नकद और लगभग 1.25 करोड़ रुपये मूल्य की कीमती वस्तुएं जब्त किए जाने की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा जुलाई 2023 में करीब 6.02 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई थीं। एजेंसी ने अमित कात्याल को नवंबर 2023 में गिरफ्तार किया था।
2024 में दाखिल हुई थी अभियोजन शिकायत
ED ने 8 जनवरी 2024 को पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की थी। इसमें राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव, अमित कात्याल समेत अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए थे। इसके बाद 6 अगस्त 2024 को ED ने सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की, जिसमें लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। ED के अनुसार, कोर्ट ने 18 सितंबर 2024 को इस पूरक शिकायत का संज्ञान लिया था।
अब 14 और 15 अक्टूबर को होगी आगे की सुनवाई
30 सितंबर की कार्यवाही के बाद मामले में आरोप तय करने को लेकर बहस अब 14 और 15 अक्टूबर को आगे बढ़ेगी। अदालत में आरोप तय होना मुकदमे में आगे की प्रक्रिया का हिस्सा है। गौरतलब है कि आरोप तय होना दोषसिद्धि नहीं होता। किसी आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण मुकदमे के दौरान पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और अदालत के अंतिम फैसले से होता है।


