पटना: बिहार में जमीन-जायदाद से जुड़े पुराने दस्तावेजों को ऑनलाइन करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य के निबंधन विभाग की इस पहल से अब लोगों को पुराने जमीन के कागजात की कॉपी लेने के लिए बार-बार निबंधन कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, 10 एजेंसियां मिलकर हर दिन करीब 80 हजार से एक लाख पुराने दस्तावेजों को डिजिटाइज कर पोर्टल पर अपलोड कर रही हैं।
1990 से 1995 तक के रिकॉर्ड को दी गई प्राथमिकता
बिहार सरकार ने पुराने निबंधित दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। पहले चरण में 1990 से 1995 के बीच निबंधित करीब 33 लाख दस्तावेजों को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक इनमें से 24 लाख 68 हजार से अधिक दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। इन दस्तावेजों की सच्ची प्रतिलिपि लोग ऑनलाइन डाउनलोड भी कर सकते हैं। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जिन्हें जमीन या संपत्ति से जुड़े पुराने रिकॉर्ड की जरूरत पड़ती है। पहले ऐसे दस्तावेजों के लिए संबंधित कार्यालयों में जाकर आवेदन करना पड़ता था और कई बार काफी समय भी लग जाता था।
1908 से 1989 तक के करीब 5 करोड़ रिकॉर्ड भी होंगे डिजिटल
पुराने दस्तावेजों को ऑनलाइन करने का काम सिर्फ 1990 के बाद के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। दूसरे और अंतिम चरण में 1908 से 1989 तक के करीब 5 करोड़ पुराने दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप दिया जा रहा है। इस अवधि के करीब 21 लाख 85 हजार दस्तावेज अब तक अपलोड किए जा चुके हैं। विभाग के मुताबिक बड़ी संख्या में पुराने दस्तावेजों की पीडीएफ तैयार हो चुकी है। इन्हें चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
पुराने दस्तावेजों में कई भाषाओं और लिपियों की चुनौती
करीब एक सदी पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करना आसान काम नहीं है। कई दस्तावेज फारसी, कैथी और दूसरी पुरानी लिपियों में दर्ज हैं। ऐसे दस्तावेजों को समझने और डिजिटल प्रक्रिया में शामिल करने के लिए एजेंसियां प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद ले रही हैं। यानी सरकार के सामने सिर्फ रिकॉर्ड को स्कैन करने की चुनौती नहीं है, बल्कि पुराने दस्तावेजों को सही तरीके से सुरक्षित करने और उनकी डिजिटल कॉपी तैयार करने की भी जिम्मेदारी है।
1996 से अब तक के दस्तावेज पहले ही डिजिटाइज
निबंधन विभाग के अनुसार 1996 से अब तक के सभी निबंधित दस्तावेज पूरी तरह डिजिटाइज किए जा चुके हैं। वहीं 2006 से 2026 तक के दस्तावेज कंप्यूटरकृत निबंधन प्रणाली के तहत तैयार और अपलोड किए जा रहे हैं। वर्तमान में निबंधित होने वाले दस्तावेजों को भी ऑनलाइन देखने और डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध है। निबंधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित पक्षकार के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर दस्तावेज डाउनलोड करने का लिंक भेजा जाता है।
घर बैठे मिल सकेगा जमीन का पुराना रिकॉर्ड
बिहार में पुराने जमीन दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन से आम लोगों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वे घर बैठे अपने जमीन-जायदाद से जुड़े पुराने कागजात देख और डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए लोगों को निबंधन कार्यालय के चक्कर लगाने और पुराने रिकॉर्ड की तलाश में समय गंवाने की जरूरत कम होगी। डिजिटल रिकॉर्ड से दस्तावेजों को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी और भविष्य में जरूरत पड़ने पर उन्हें ऑनलाइन हासिल करना आसान होगा।
ऑनलाइन रिकॉर्ड से बढ़ेगी सुविधा
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पुराने निबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड में बदलना और आम लोगों की पहुंच आसान बनाना है। आने वाले समय में जैसे-जैसे पुराने रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड होंगे, बिहार के लोगों के लिए जमीन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज हासिल करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो सकता है।
ऑनलाइन पोर्टल: enibandhan.bihar.gov.in


