Jharkhand Sand Mining: झारखंड में 16 अक्टूबर से बालू खनन पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की रोक हटने जा रही है, लेकिन आम लोगों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम है। राज्य में बालू घाटों की नीलामी तो हुई है, मगर पर्यावरण स्वीकृति और अन्य जरूरी अनुमतियां नहीं मिलने के कारण ज्यादातर घाटों से खनन शुरू नहीं हो सकेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बी कैटेगरी के 444 बालू घाटों में से 294 की नीलामी हुई है, जबकि अब तक सिर्फ छह जिलों के 14 घाटों को ही जरूरी मंजूरियां मिली हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों के लिए बालू की कीमतों में फिलहाल बड़ी गिरावट की संभावना नहीं दिख रही है।
रोक हटने के बाद भी क्यों नहीं सस्ता होगा बालू?
झारखंड में पिछले चार महीनों से बालू खनन पर लगी रोक के कारण बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है। अब रोक हटने के बावजूद सभी घाटों पर खनन शुरू होना संभव नहीं है। इसके लिए पर्यावरण स्वीकृति (EC), ग्रामसभा की सहमति और कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। राज्य के 444 बी कैटेगरी बालू घाटों में से 294 की नीलामी हो चुकी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में घाट आवश्यक अनुमतियों के इंतजार में हैं। नतीजतन, फिलहाल केवल मंजूरी प्राप्त घाटों से ही बालू उठाव हो सकेगा। इसका सीधा असर घर बनाने वाले लोगों, निर्माण कारोबारियों और ठेकेदारों पर पड़ सकता है। सीमित आपूर्ति के कारण बाजार में बालू की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
एनओसी के अभाव में अटकी खनन की प्रक्रिया
बालू घाटों से खनन शुरू नहीं होने को लेकर विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने के सवाल भी उठ रहे हैं। खान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित जिलों में जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होनी चाहिए। वहीं, रांची के खनन पदाधिकारी के मुताबिक, घाट का ठेका लेने वाले संवेदक की जिम्मेदारी है कि वह जरूरी एनओसी प्राप्त करे। इस खींचतान के बीच नीलामी के बाद भी कई घाटों पर काम शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल छह जिलों के 14 घाटों को पर्यावरण स्वीकृति समेत अन्य जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने की जानकारी है।
किस जिले में कितने बालू घाटों से शुरू हो सकता है खनन?
1. रांची: 19 घाटों में सिर्फ तीन को मंजूरी
रांची जिले में कुल 19 बालू घाट हैं और सभी की नीलामी हो चुकी है। हालांकि, इनमें से सिर्फ तीन घाटों को जरूरी अनुमति मिली है। इनमें सिल्ली के श्याम नगर, सुंडिल और चोकेसेरेंग घाट शामिल हैं। इन घाटों को पर्यावरण स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति और सीटीओ मिलने की जानकारी है। इसके बावजूद श्याम नगर घाट से खनन शुरू होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। रांची में 100 सीएफटी बालू के लिए करीब 4,500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। ऐसे में आपूर्ति सामान्य होने तक उपभोक्ताओं को राहत मिलना मुश्किल हो सकता है।
2. पूर्वी सिंहभूम: कुछ घाटों से ही उठाव की उम्मीद
पूर्वी सिंहभूम जिले में कुल पांच बालू घाट हैं। गुड़ाबांदा के कोरिया मोहनपाल-1 और कोरिया मोहनपाल-2 तथा बहरागोड़ा के बनकाटा घाट की नीलामी हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जरूरी अनुमति मिलने के बावजूद सभी घाटों से खनन शुरू नहीं होगा। जिले में 100 सीएफटी बालू की कीमत करीब 6,000 से 7,000 रुपये बताई जा रही है।
3. धनबाद: 10 घाट, लेकिन खनन पर अभी भी अड़चन
धनबाद में बी कैटेगरी के कुल 10 बालू घाट हैं। इनकी नीलामी पिछले साल हो चुकी थी, लेकिन पर्यावरण स्वीकृति, ग्रामसभा की सहमति और अन्य जरूरी एनओसी नहीं मिलने के कारण खनन शुरू नहीं हो पाया है। यहां 100 सीएफटी बालू के लिए करीब 6,500 से 7,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। जरूरी मंजूरियां नहीं मिलने से जिले में बालू की उपलब्धता प्रभावित रहने की आशंका है।
4. हजारीबाग: चार घाटों से खनन की उम्मीद
हजारीबाग जिले में कुल 11 बालू घाट हैं और सभी की नीलामी हो चुकी है। इनमें बड़कागांव के सनराह और सोनपुरा तथा लंगाटू-सिकरी-पंडरिया-सिरमा घाट से 16 अक्टूबर से खनन शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, बाकी नौ घाटों को जरूरी एनओसी नहीं मिलने की जानकारी है। इन घाटों पर खनन कब शुरू होगा, यह अनुमति मिलने पर निर्भर करेगा।
5. गिरिडीह: 42 घाटों की नीलामी अब तक नहीं
गिरिडीह जिले में कुल 42 बालू घाट हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक किसी की नीलामी नहीं हुई है। यहां 100 सीएफटी बालू की कीमत करीब 2,000 से 3,000 रुपये बताई जा रही है। नीलामी और जरूरी स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण एनजीटी की रोक हटने के बाद भी जिले में बालू की आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं बनी रह सकती हैं।
10 साल बाद नीलामी, फिर भी आम लोगों को राहत का इंतजार
झारखंड में लंबे अंतराल के बाद बालू घाटों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई थी। सरकार ने घाटों का ठेका निजी संवेदकों को देने का फैसला किया और विभिन्न जिलों में नीलामी से राजस्व भी मिला। लेकिन नीलामी और खनन की शुरुआत के बीच जरूरी अनुमतियों की प्रक्रिया बड़ी बाधा बन गई है। इससे एक ओर सरकार को संभावित राजस्व और आपूर्ति बढ़ाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर आम लोगों को निर्माण सामग्री महंगी मिलने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के नजरिये से देखें तो केवल नीलामी पूरी होना पर्याप्त नहीं है। जब तक पर्यावरणीय और संचालन संबंधी मंजूरियां नहीं मिलतीं, तब तक बाजार में बालू की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना मुश्किल रहेगा।
बिहार से बालू मंगाने पर बढ़ सकती है निर्भरता
झारखंड में पर्याप्त मात्रा में बालू उपलब्ध नहीं होने पर दूसरे राज्यों से आपूर्ति का विकल्प अपनाया जा सकता है। पहले भी गया और औरंगाबाद जैसे बिहार के जिलों से बालू मंगाए जाने की बात सामने आई थी। बोड़ेया के बालू व्यापारी मंटू साहू के अनुसार, झारखंड में घाटों को एनओसी मिलने की प्रक्रिया कठिन है, जबकि बिहार से चालान के जरिए बालू लाना संभव होता है। हालांकि, दूसरे राज्य से बालू मंगाने पर परिवहन लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
बालू की आपूर्ति सीमित रहने पर इसका असर मकान निर्माण और अन्य विकास कार्यों की लागत पर पड़ सकता है। खासकर वे परिवार प्रभावित हो सकते हैं, जो सीमित बजट में अपना घर बनवा रहे हैं। 16 अक्टूबर से एनजीटी की रोक हटना खनन गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक राहत तभी मिलेगी, जब ज्यादा से ज्यादा घाटों को जरूरी मंजूरियां मिलें और बाजार में वैध बालू की आपूर्ति बढ़े। फिलहाल, आम लोगों को सस्ते बालू के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।




