Ranchi: झारखंड में DGP की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से बनाई गई DGP नियुक्ति नियमावली को सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं माना है। कोर्ट ने तदाशा मिश्रा की नियमित DGP के तौर पर नियुक्ति को भी स्वीकार नहीं किया है। हालांकि, नई नियमित नियुक्ति होने तक उन्हें कार्यकारी व्यवस्था के तहत पद पर बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने Amicus Curiae की रिपोर्ट, केंद्र सरकार की दलीलों और झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की ओर से रखे गए पक्ष पर विचार किया।
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DGP नियुक्ति नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति
झारखंड सरकार ने राज्य में DGP की नियुक्ति को लेकर अलग नियमावली तैयार की थी। इसी नियमावली की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा। केंद्र सरकार ने अदालत में दलील दी कि झारखंड की नियमावली सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं है। केंद्र के मुताबिक DGP के चयन में UPSC की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए, लेकिन झारखंड की नियमावली में UPSC की भूमिका काफी सीमित कर दी गई है। केंद्र का कहना था कि चयन प्रक्रिया से जुड़ी इंपैनल कमेटी की अध्यक्षता UPSC के स्तर पर होनी चाहिए, जबकि झारखंड की नियमावली में UPSC के केवल एक सदस्य को शामिल किया गया है।
Amicus Curiae ने नियमावली की दो धाराओं पर जताई आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त Amicus Curiae ने भी झारखंड की DGP नियुक्ति नियमावली की समीक्षा की। रिपोर्ट में नियमावली की दो धाराओं को लेकर आपत्ति जताई गई है। Amicus Curiae की रिपोर्ट में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के समय को लेकर भी सवाल उठाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले DGP पद पर नियुक्ति किया जाना उचित नहीं था। केंद्र सरकार ने भी इस नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई थी। हालांकि, इस मामले में अदालत के निर्देश के अनुसार नई नियमित नियुक्ति होने तक कार्यकारी व्यवस्था जारी रहेगी।
29 सितंबर की सुनवाई में भी उठा था मामला
DGP नियुक्ति नियमावली को लेकर 29 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान भी केंद्र सरकार ने अपनी आपत्ति अदालत के सामने रखी थी। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि सरकार लगभग छह महीने पहले ही नियमावली को लेकर अपनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट कर चुकी है। केंद्र सरकार ने आरोप लगाया था कि झारखंड की ओर से बनाई गई नियमावली सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुरूप नहीं है। केंद्र ने मामले में अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध भी किया था। इसके जवाब में झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि राज्य सरकार को इस संबंध में कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने केंद्र की ओर से दाखिल रिपोर्ट की जानकारी होने से भी इनकार किया था।
अब नई नियुक्ति पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। तदाशा मिश्रा फिलहाल कार्यकारी व्यवस्था के तहत जिम्मेदारी संभालेंगी, जब तक नए DGP की नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती। पूरे मामले में अब राज्य सरकार को DGP चयन की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ानी होगी। UPSC की भूमिका और चयन प्रक्रिया को लेकर अदालत की टिप्पणियां इस नियुक्ति प्रक्रिया के लिए अहम मानी जा रही हैं।



