New Delhi : हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की आर्थिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है। अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ यानी आयात शुल्क लगा दिए थे। टैरिफ का मतलब है किसी देश से आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाए ताकि वह महंगा हो और घरेलू उद्योगों को लाभ मिले।
विवाद का केंद्र: IEEPA
इस पूरे मामले का केंद्र इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है, जो 1977 में लागू किया गया था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को गंभीर खतरों जैसे युद्ध, विदेशी दुश्मनों से बड़ा आर्थिक खतरा या अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में विशेष शक्तियां दी जाती हैं। IEEPA के अंतर्गत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकते हैं, उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं या तत्काल आर्थिक निर्णय लागू कर सकते हैं। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए इसी कानून का सहारा लिया था।
राष्ट्रपति के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार द्वारा लगाए गए टैरिफ के कानूनी आधार पर सवाल उठाए थे। जजों ने पूछा कि क्या राष्ट्रपति को इस तरह वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार है। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प केवल 150 दिनों तक 15% टैरिफ लगा सकते हैं, और इसके लिए ठोस कारण होना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि IEEPA में ‘टैरिफ’ शब्द कहीं उल्लिखित नहीं है और न ही राष्ट्रपति के अधिकारों की स्पष्ट सीमा तय की गई है। यह फैसला राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करता है और भविष्य में ऐसे आर्थिक निर्णयों की कानूनी व्याख्या के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।

