Begusarai: बिहार के बेगूसराय जिले में कथित झोलाछाप डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। तेघड़ा थाना क्षेत्र के नोनपुर गांव में एक महिला की तबीयत इंजेक्शन लगाए जाने के बाद बिगड़ने का मामला सामने आया है। पीड़िता की पहचान धनवंती देवी, पति श्यामाकांत ठाकुर, के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, महिला पिछले एक सप्ताह से आईसीयू में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। परिवार ने संबंधित ग्रामीण चिकित्सक के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है।
गलत इंजेक्शन के बाद बिगड़ी महिला की तबीयत
मिली जानकारी के अनुसार, धनवंती देवी नोनपुर गांव की रहने वाली हैं। परिजनों का आरोप है कि उनका इलाज ग्रामीण चिकित्सक मनोज ठाकुर कर रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर गलत इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। परिवार का दावा है कि महिला को घाव हो गया और उनकी परेशानी लगातार बढ़ती गई। हालांकि, इंजेक्शन और महिला की बिगड़ती हालत के बीच चिकित्सकीय संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
ब्रेन स्ट्रोक के बाद हालत और गंभीर होने का दावा
परिजनों के अनुसार, महिला के शरीर में संक्रमण फैलने की आशंका है। उन्होंने बताया कि रविवार को ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद उनकी स्थिति और गंभीर हो गई। फिलहाल महिला आईसीयू में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। हालांकि, संक्रमण की वास्तविक वजह, ब्रेन स्ट्रोक के चिकित्सकीय कारण और इंजेक्शन की भूमिका को लेकर विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
इलाज के खर्च से परेशान परिवार
महिला की गंभीर हालत के बीच परिजनों के सामने बेहतर इलाज कराने और खर्च जुटाने की चुनौती है। परिवार उनकी जान बचाने के लिए प्रयास कर रहा है। परिजनों ने इलाज के दौरान कथित लापरवाही की जांच किए जाने की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और योग्य चिकित्सकों तक पहुंच का सवाल खड़ा कर दिया है। कई जगहों पर स्थानीय स्तर पर इलाज की सुविधा मिलने के कारण लोग ग्रामीण चिकित्सकों के पास पहुंचते हैं। लेकिन आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता और प्रशिक्षण के बिना इलाज किए जाने पर मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी नजरें
मामले में स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण है। जांच के जरिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि महिला का इलाज किस परिस्थिति में किया गया, इंजेक्शन कौन-सा था और उनकी हालत बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या है। यदि जांच में बिना वैध योग्यता के चिकित्सा करने या इलाज में लापरवाही बरतने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इस मामले में परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित चिकित्सक का पक्ष सामने आना बाकी है। जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही घटना के कारणों तथा जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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