बिहार के सहरसा में कचरे से खाद, खाद से नर्सरी और नर्सरी से कमाई

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now सहरसा की 21 ग्राम पंचायतों में जैविक कचरे से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर नर्सरी विकसित की जा रही है। पौधों की बिक्री से पंचायतों को सालाना 30-40 हजार रुपये की आय हो रही है। Patna

बिहार के सहरसा में कचरे से खाद, खाद से नर्सरी और नर्सरी से कमाई
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
  • सहरसा की 21 ग्राम पंचायतों में जैविक कचरे से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर नर्सरी विकसित की जा रही है। पौधों की बिक्री से पंचायतों को सालाना 30-40 हजार रुपये की आय हो रही है।

Patna : जलवायु परिवर्तन और स्वच्छता की चुनौतियों से निपटने के लिए बिहार के सहरसा जिले में एक अनूठी पहल की जा रही है। जिले की 21 ग्राम पंचायतों में स्थापित कचरा प्रसंस्करण इकाइयों (डब्ल्यूपीयू) में जैविक कचरे का प्रसंस्करण कर वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है।

कई डब्ल्यूपीयू में नाडेप और कम्पोस्ट पिट के जरिए जैविक कचरे का निपटारा किया जा रहा है। तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल डब्ल्यूपीयू परिसर में ही पौधों की नर्सरी विकसित करने में किया जा रहा है। इस तरह पंचायतों में कचरे से खाद, खाद से नर्सरी और नर्सरी से राजस्व का मॉडल तैयार हुआ है।

जैविक कचरे से तैयार हो रही वर्मी कम्पोस्ट

इस पहल से पहले अक्सर गंदगी से भरे रहने वाले डब्ल्यूपीयू परिसरों को भी नया स्वरूप मिला है। रासायनिक खादों के बजाय जैविक वर्मी कम्पोस्ट के इस्तेमाल से नर्सरी में तैयार पौधों की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ उनकी वृद्धि भी तेजी से हो रही है।

जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की जैविक संरचना मजबूत हुई है और उसकी जलधारण क्षमता में भी वृद्धि हुई है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि जैविक कचरे के समय पर प्रसंस्करण से गांवों में गंदगी कम हो रही है और बीमारियां फैलने का खतरा भी घटा है।

नर्सरी से पंचायतों को हो रही आय

पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार, यह मॉडल केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है। पंचायतों में विकसित की जा रही नर्सरी ग्रामीण क्षेत्रों को ग्रीन विलेज बनाने की दिशा में भी भूमिका निभा रही हैं।

नर्सरी में तैयार पौधों की बिक्री से पंचायतों को हर वर्ष 30-40 हजार रुपये का राजस्व मिल रहा है। इस राशि का उपयोग लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (एलएसबीए) के तहत संचालित डब्ल्यूपीयू, पैडल रिक्शा, ई-रिक्शा और अन्य परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं रखरखाव में किया जा रहा है।

श्रवण कुमार ने बताया प्रभावी मॉडल

ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सहरसा में वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट के माध्यम से कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अच्छी परंपरा की शुरुआत हुई है।

उन्होंने कहा कि कचरे से खाद, खाद से नर्सरी और नर्सरी से राजस्व का यह प्रभावी चक्र राज्य में स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की नई दिशा तय करेगा।

मंत्री ने कहा कि जैविक कचरे से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करना, उससे पौधों की नर्सरी विकसित करना और हर वर्ष मिलने वाले 30-40 हजार रुपये के राजस्व का इस्तेमाल लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की परिसंपत्तियों के रखरखाव में करना पंचायतों के उत्कृष्ट और दूरदर्शी प्रबंधन का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि यह पूरी पहल पंचायत मुखिया और स्थानीय प्रतिनिधियों के सहयोग से संभव हो पाई है।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी-अभी.