Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित झारखंड कैबिनेट की बैठक में कई बड़े और जनहित से जुड़े निर्णय लिए गए। कुल 12 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों में नगर पालिका संवेदकों के लिए जीएसटी सर्टिफिकेट अनिवार्य करना और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गीग वर्कर्स के लिए कल्याण बोर्ड का गठन जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं।
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अब जरूरी होगा झारखंड का जीएसटी रजिस्ट्रेशन:
कैबिनेट ने ‘झारखंड नगर पालिका संवेदक निबंधन नियमावली’ में संशोधन को मंजूरी दी है। अब राज्य के किसी भी नगर निकाय में ठेका लेने के लिए संवेदकों को झारखंड राज्य का वैध जीएसटी सर्टिफिकेट दिखाना होगा, चाहे वे राज्य से हों या बाहर से। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।
गीग वर्कर्स के लिए कल्याण बोर्ड का गठन:
जोमैटो, स्विग्गी, ओला, उबर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले लाखों गीग वर्कर्स के लिए सरकार ने ‘झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित श्रमिक कल्याण बोर्ड’ बनाने का निर्णय लिया है। इस बोर्ड के ज़रिए वर्कर्स का डेटा ऑनलाइन संग्रहित किया जाएगा और उनके लिए एक विशेष वेलफेयर फंड भी बनाया जाएगा। इसके लिए आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक लाया जाएगा।
अन्य प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं:
- अवैध खनन पर सख्ती: अब जिला स्तर पर अधिकारी कार्रवाई कर सकेंगे और जुर्माना भी लगा सकेंगे।
- गृह विभाग के डॉक्टरों का ट्रांसफर: अब वे स्वास्थ्य विभाग के अधीन काम करेंगे।
- स्कूल शिक्षकों की बहाली: कोर्ट के आदेश के अनुसार 35 शिक्षकों को बहाल किया जाएगा या पेंशन लाभ मिलेगा।
- सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में पुनर्गठन: 506 पद खत्म कर 36 नए पद सृजित, जिससे 24 करोड़ की बचत होगी।
- गढ़वा जलापूर्ति योजना और पाकुड़-बरहड़वा रोड निर्माण को मिली मंजूरी।
- बोकारो व गोड्डा अभियंत्रण कॉलेज के लिए 85 शिक्षक और 125 अन्य पदों का सृजन।
ये निर्णय राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर सेवाएं देने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।



