Simdega: झारखंड के सिमडेगा जिले में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से सिक्योरिटी मनी वसूलकर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के कथित सरगना ओम प्रकाश समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में करीब 5 से 6 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है।
यह मामला बानो और कुरडेग थाना क्षेत्र से जुड़ा है। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। आरोप है कि भिएसके फाउंडेशन नाम की संस्था के जरिए अलग-अलग पदों पर नौकरी दिलाने का भरोसा देकर लोगों से बड़ी रकम ली गई।
शिकायत के बाद शुरू हुई पुलिस की जांच
पुलिस के अनुसार ग्रामीणों ने संस्था पर नौकरी के नाम पर पैसे लेने और ठगी करने का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर बानो थाना में कांड संख्या 27/26 और कुरडेग थाना में कांड संख्या 36/26 दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्रीकांत एस. खोटरे के निर्देश पर विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई। टीम का नेतृत्व वरीय पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) रनवीर सिंह और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी धर्मदेव पासवान ने किया।
तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंची SIT
SIT ने तकनीकी जांच और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को कथित गिरोह की गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी बरामद किए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की जांच की जा रही है।
बड़े पदों का लालच देकर लिया जाता था पैसा
पुलिस जांच में कथित तौर पर सामने आया कि भिएसके फाउंडेशन का संचालन मुख्य आरोपी ओम प्रकाश कर रहा था। संस्था में कई तरह के पद बनाए गए थे और इन पदों पर नियुक्ति के नाम पर लोगों से सिक्योरिटी मनी वसूली जाती थी।
जांच के अनुसार अलग-अलग पदों के लिए रकम इस तरह ली जाती थी:
| पद | कथित सिक्योरिटी मनी |
|---|---|
| स्टेट हेड | 3 लाख रुपये |
| डिस्ट्रिक्ट हेड | 1.5 लाख रुपये |
| ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर | 60 हजार रुपये |
| सेंटर इंचार्ज | 40 हजार रुपये |
पुलिस का कहना है कि इसी तरह बड़ी संख्या में लोगों को जोड़कर उनसे रकम जुटाई गई।
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NTT और PTT के नाम पर भी वसूली
पुलिस के मुताबिक कथित तौर पर बाल एवं जननी शिक्षा अभियान के तहत NTT के नाम पर 40 हजार रुपये और PTT के नाम पर 60 हजार रुपये लिए जाते थे।
लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। कथित गिरोह की ओर से आकर्षक पोस्टर और पंपलेट भेजे जाते थे। इसके साथ ही दोगुना इंसेंटिव और कैश प्राइज जैसे प्रलोभन देकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जाता था।
संपत्ति खरीदने और पैसों के इस्तेमाल की जांच
पुलिस जांच अब सिर्फ ठगी की रकम तक सीमित नहीं है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि संस्था के जरिए कथित तौर पर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।
पुलिस के अनुसार इस राशि से निजी संपत्ति अर्जित करने और संपत्ति खरीदने की जानकारी सामने आई है। पीड़ितों की रकम वापस दिलाने के उद्देश्य से आरोपियों की संपत्तियों को अटैच और कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
इसके अलावा संस्था के माध्यम से हुए बड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
छह आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
पुलिस ने इस मामले में अशोक साय, ओम प्रकाश, एनिस केरकेट्टा, सरोज केरकेट्टा, गोरैती केरकेट्टा और कुन्दन शर्मा को गिरफ्तार किया है।
सभी आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।
पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
एसपी श्रीकांत एस. खोटरे ने लोगों से अपील की है कि नौकरी या किसी संस्था में नियुक्ति के नाम पर किसी व्यक्ति या संगठन को बिना सत्यापन के पैसे नहीं दें।
पुलिस ने कहा है कि यदि किसी संस्था की नौकरी, नियुक्ति प्रक्रिया या पैसे की मांग को लेकर संदेह हो, तो पहले उसकी वैधता की जांच करें। किसी संदिग्ध गतिविधि या ठगी की जानकारी मिलने पर तत्काल नजदीकी थाना या पुलिस को सूचना दें।


