Hazaribagh : बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग के मुख्य कैंपस सभागार में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सोमवार को सरस्वती पूजा मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में आकर्षक साज-सज्जा की गई। साथ ही मां सरस्वती की आकर्षक प्रतिमा स्थापित कर विधि पूर्वक पूजा अर्चना की गई। बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं भी पूरी श्रद्धा के साथ पूजा में शामिल हुए और विद्या की देवी मां शारदे की अराधना की। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिक्षा, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। इस प्रकार उनसे ज्ञान और कला प्राप्त करने के लिए लोग बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के रूप में मनाते हैं।
उन्होंने कहा कि मां सरस्वती सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों की आराध्य देवी हैं और बसंत ऋतु अध्ययन के लिए सबसे अनुकूल समय होता है। सरस्वती ज्ञान की अदृश्य नदी के निरंतर प्रवाह का प्रतीक हैं। वहीं कुलपति प्रो पीके नायक ने कहा कि सरस्वती पूजन से पूर्व गणेश वंदना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सरस्वती मां ज्ञान देती हैं तो गणेश जी उसके सदुपयोग के लिए विवेक प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी मान्यता है कि मां सरस्वती की पूजा से पूरे वर्ष पढ़ाई के दौरान मां सरस्वती की कृपा पूजा करने वाले पर बनी रहेगी। ऐसे में सरस्वती पूजा शिक्षण कार्यों से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
बताते चलें कि इस दौरान सरस्वती वंदना और आरती गायन किया गया। इसके बाद मौजूद सभी लोगों के बीच प्रसाद वितरण किया गया। बुधवार को मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।



