आदिवासी और ग्रामीण उत्थान के लिए कार्य करने पर डॉ. नरेश प्रसाद सिंह हुए सम्मानित

मुकेश रंजन Ranchi : राधिका एंड एतवारी मेमोरियल ट्रस्ट के बैनर तले एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन कांके स्थित जनरल हॉस्पिटल के सभा कक्ष में किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शारदा ग्रुप के सचिव सह प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश प्रसाद

आदिवासी और ग्रामीण उत्थान के लिए कार्य करने पर डॉ. नरेश प्रसाद सिंह हुए सम्मानित
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मुकेश रंजन
Ranchi : राधिका एंड एतवारी मेमोरियल ट्रस्ट के बैनर तले एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन कांके स्थित जनरल हॉस्पिटल के सभा कक्ष में किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शारदा ग्रुप के सचिव सह प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश प्रसाद सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ममता सिंह को ट्रस्ट की ओर से स्मृति चिन्ह (मोमेंटो), अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।

आदिवासी और ग्रामीण उत्थान के लिए कार्य करने पर डॉ. नरेश प्रसाद सिंह हुए सम्मानित
आदिवासी और ग्रामीण उत्थान के लिए कार्य करने पर डॉ. नरेश प्रसाद सिंह हुए सम्मानित

सम्मान समारोह की अध्यक्षता ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष एवं काकें नर्सिंग होम के निदेशक, साथ ही रेड क्रॉस के अध्यक्ष डॉ. शम्भु प्रसाद सिंह ने की। ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष डॉ. कुमारी आभा भी इस अवसर पर मंच पर उपस्थित रहीं। समारोह में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ-साथ समाज के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में डॉ. नरेश प्रसाद सिंह ने अपने 22 वर्षों की यात्रा को साझा करते हुए बताया कि वे एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और इसलामपुर (नालंदा, बिहार) के मूल निवासी हैं। उनके पिता किसान थे और यही कारण है कि वे मिट्टी से गहराई से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 से उन्होंने आदिवासी, ग्रामीण, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए कार्य प्रारंभ किया। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में उन्होंने जल संरक्षण, भूमि सुधार, और जैविक खेती को बढ़ावा दिया।

डॉ. सिंह ने बताया कि उनके नेतृत्व में अब तक देश के 8 राज्यों—झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तरप्रदेश और जम्मू-कश्मीर—के 67 जिलों और 5,500 गांवों में 3 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया गया है। इसके तहत 16,000 हेक्टेयर भूमि पर वाटरशेड परियोजनाएं, 5,000 एकड़ में सिंचाई सुविधा, और 6,000 एकड़ बंजर भूमि को खेती योग्य बनाकर बहुफसलीय उत्पादन के योग्य किया गया है।

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