Kolkata : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप में तृणमूल कांग्रेस के विधायक मंटूराम पाखिरा के खुलासे ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। विधायक ने स्वीकार किया है कि उनके क्षेत्र में अवैध रूप से आए बांग्लादेशी नागरिकों को ₹10,000 की रिश्वत लेकर पहचान पत्र और वोटर कार्ड जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने इस गोरखधंधे में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है।
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प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप
विधायक पाखिरा के अनुसार, एसडीओ और बीडीओ कार्यालयों के कुछ कर्मचारी इस संगठित गिरोह का हिस्सा हैं, जो दलालों के साथ मिलकर अवैध घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता के दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह कार्य केवल कुछ बिचौलियों का नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित नेटवर्क का हिस्सा है।
ग्राम पंचायतों में वोटर संख्या में उछाल
रामकृष्ण, स्वामी विवेकानंद और प्रतापदित्यनगर ग्राम पंचायत क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी को लेकर संदेह जताया गया है। जांच में सामने आया है कि कई बांग्लादेशी मछुआरे सालों से इन इलाकों में रह रहे हैं और अब फर्जी दस्तावेज बनवाकर भारतीय मतदाता बन गए हैं।
छह हजार फर्जी मतदाताओं की सूची सौंपी गई
विधायक ने काकद्वीप उपजिला प्रशासन को छह हजार संदिग्ध मतदाताओं की सूची सौंपी है। प्रारंभिक जांच में कुछ लोगों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने पैसे देकर मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाया। स्थानीय लोगों के अनुसार, तृणमूल पार्टी के कार्यकर्ताओं को पैसे देने पर उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया गया।
विपक्ष ने की सीबीआई जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि एसडीओ मधुसूदन मंडल और डीएम सुमित गुप्ता जैसे अधिकारी इस पूरे घोटाले में शामिल हैं। उन्होंने मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
सरकार की सफाई: FIR दर्ज, कार्रवाई शुरू
तृणमूल प्रवक्ता अरूर मुखर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही फर्जी मतदाताओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दे चुकी हैं। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और जांच प्रक्रिया जारी है।



