पारस हॉस्पिटल रांची में जटिल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सफल

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची स्थित पारस हॉस्पिटल, एचईसी में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित एक मरीज का सफल कूल्हा प्रत्यारोपण किया गया है। यह सर्जरी झारखंड राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत पूरी तरह नि:शुल्क की गई। हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक कंसल्टेंट डॉ. अवकाश

पारस हॉस्पिटल रांची में जटिल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सफल
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Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची स्थित पारस हॉस्पिटल, एचईसी में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित एक मरीज का सफल कूल्हा प्रत्यारोपण किया गया है। यह सर्जरी झारखंड राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत पूरी तरह नि:शुल्क की गई। हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक कंसल्टेंट डॉ. अवकाश कुमार की देखरेख में यह जटिल और दुर्लभ ऑपरेशन सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।

डॉ. अवकाश कुमार ने जानकारी दी कि यह मरीज सिकल सेल एनीमिया से ग्रसित था, जिसकी वजह से उसके कुल्हे का जोड़ (हिप जॉइंट) एवस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। मरीज को लगातार चलने-फिरने में कठिनाई हो रही थी। इस सर्जरी के दौरान मरीज को चार बार खून चढ़ाया गया। तमाम जटिलताओं के बावजूद ऑपरेशन सफल रहा और अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है तथा सामान्य रूप से चलने-फिरने लगा है।

डॉ. अवकाश ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जो झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अधिक देखने को मिलता है। इस रोग में शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं अर्धचंद्राकार हो जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी, दर्द, सूजन और अंगों को नुकसान होता है। सर्जरी के दौरान खून का थक्का जमने, संक्रमण और ऑक्सीजन की कमी जैसे कई जोखिम होते हैं, लेकिन पारस हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम ने इन सभी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया।

इस उपलब्धि पर पारस एचईसी हॉस्पिटल के मार्केटिंग हेड मानस लाभ ने कहा कि पारस हॉस्पिटल झारखंड राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध प्रमुख अस्पतालों में से एक है। इस योजना के तहत सरकारी कर्मियों और उनके आश्रितों को उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं नि:शुल्क मिलती हैं। उन्होंने कहा कि यह सर्जरी संभवतः इस योजना के अंतर्गत राज्य की पहली सफल पूर्ण हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी है, जो पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है।

यह सफलता न केवल हॉस्पिटल की चिकित्सकीय दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि झारखंड अब जटिल चिकित्सा मामलों में भी आत्मनिर्भर होता जा रहा है।

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