Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में 8 जून को आयोजित पाहन महासम्मेलन में जनजातीय समाज की आवाज़ बुलंद हुई। इस मंच से जननेता सोमा उरांव ने धर्मांतरण के मुद्दे पर चर्च संगठनों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, “अब बहुत हो चुका है, और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उनके इन तीखे शब्दों से सभा में मौजूद हजारों लोगों में नया जोश भर गया।
Also Read : रांची फ्लाईओवर पर स्टंट का वायरल वीडियो, बाइक जब्त
सोमा उरांव ने कहा कि कुछ बाहरी संस्थाएं शिक्षा और सेवा के नाम पर आदिवासी समाज की संस्कृति, पहचान और आस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चर्च से जुड़े कुछ संगठनों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो जनजातीय अस्मिता पर सीधा हमला है।
महासम्मेलन में पाहन, युवा, छात्र, महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में धर्मांतरण का विरोध किया और अपनी परंपरा व सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का संकल्प लिया। सम्मेलन में उमड़ी भीड़ ने स्पष्ट कर दिया कि अब जनजातीय समाज अपनी अस्मिता से कोई समझौता नहीं करेगा।
सोमा उरांव ने कहा कि यह महासम्मेलन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संघर्ष का आगाज़ है। अब धर्मांतरण, अपसंस्कृति और बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ी जाएगी। उन्होंने यह भी चेताया कि जो संस्थाएं आदिवासियों की आत्मा को छीनना चाहती हैं, उन्हें अब समाज से करारा जवाब मिलेगा।
सम्मेलन के दौरान जनजातीय रीति-रिवाजों और पारंपरिक गीतों के माध्यम से सांस्कृतिक एकता का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए संगठित होकर खड़ा हो।
पाहन महासम्मेलन झारखंड में एक नई जनजातीय चेतना का प्रतीक बनकर उभरा है, जो आने वाले समय में संस्कृति की रक्षा और धर्मांतरण विरोधी आंदोलन को नई दिशा देगा।



