Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची से एक बड़ा प्रशासनिक मामला सामने आया है, जिसने राज्यभर में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनरेगा के तहत सहायक अभियंताओं की दो नियुक्तियां उस समय की गईं, जब सरकार ने सभी संविदा बहालियों पर रोक लगा रखी थी।

Also Read : सिकल सेल रोगियों को बेहतर इलाज और जीवन देने की दिशा में राज्य सरकार कर रही ठोस प्रयास: हेमन्त सोरेन
दरअसल, ग्रामीण विकास विभाग ने 30 नवंबर 2021 को पत्रांक 1507 के तहत यह स्पष्ट निर्देश दिया था कि प्रखंड और पंचायत स्तर पर संविदा बहाली तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। लेकिन इसके बावजूद, 07 मार्च 2022 को रांची जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) ने आदेश संख्या 262(ii)/जि.ग्रा. के जरिए दो अभियंताओं की नियुक्ति कर दी।

नियुक्त अभियंता:
-
विमलेन्दु शेखर (ओरमांझी प्रखंड)
-
रंजन सिंह मुंडा (लापुंग प्रखंड)
इस मामले का खुलासा समाजसेवी सरफराज और रेहान की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने उपायुक्त रांची को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि इन अवैध रूप से नियुक्त अभियंताओं को तत्काल पद से हटाया जाए और अब तक मिले वेतन की वसूली चक्रवृद्धि ब्याज सहित की जाए। इसके साथ ही नियुक्ति में संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय प्राथमिकी दर्ज करने की भी मांग की गई है।
मामला क्यों बना चिंता का विषय?
यह मामला सिर्फ एक बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार के आदेशों की अवहेलना और तंत्र की पारदर्शिता पर गहरा सवाल खड़ा करता है। सरकारी योजनाओं में ऐसी मनमानी न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, बल्कि जनकल्याण की बुनियाद को भी कमजोर करती है।
जनता अब पूछ रही है:
-
जब संविदा बहाली पर रोक थी, तो नियुक्ति कैसे हुई?
-
क्या यह लापरवाही थी या फिर कोई सुनियोजित साजिश?
इस गंभीर मामले को देखते हुए, सामाजिक संगठनों ने इसकी सीबीआई जांच की भी मांग की है। अब देखना यह है कि रांची डीसी इस पर सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर मामला फाइलों में ही दब जाएगा।


