Ranchi : धर्म, परंपरा और आस्था के नाम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी है। समाजसेवी संदीप उरांव ने इस गंभीर मुद्दे पर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व हमारी संस्कृति, परंपरा और समाज के नियमों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि ऐसे लोग जाली जाति प्रमाण पत्र के सहारे अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए चलाई जा रही योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं, जबकि वास्तविक पात्र आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
संदीप उरांव ने सरकार से मांग की कि एक विशेष जांच अभियान चलाकर सभी संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्रों का तत्काल सत्यापन किया जाए। यदि कोई व्यक्ति फर्जी जाति प्रमाण पत्र का दोषी पाया जाए तो उसका प्रमाण पत्र तुरंत रद्द कर, उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो समाज में असंतोष और नाराजगी गहराती जाएगी, जिसका असर सामाजिक समरसता पर पड़ेगा।
संदीप उरांव ने कहा कि यह सिर्फ योजनाओं का दुरुपयोग नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, आस्था और परंपरा की पवित्रता पर सीधा आघात है। समाज को भ्रमित करने वाले ऐसे फर्जीवाड़ों पर अब और चुप नहीं बैठा जा सकता।
उन्होंने जिला प्रशासन और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से मांग की कि एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच समिति का गठन हो, जो इस पूरे मामले की गहराई से जांच करे और वास्तविक लाभुकों को उनका हक दिलाए।
उरांव ने यह भी कहा कि समाज के सच्चे हितैषी वही लोग हैं जो असली वंचितों के हक की लड़ाई लड़ते हैं। अगर ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो फर्जीवाड़ा करने वालों का मनोबल और बढ़ेगा और असली जरूरतमंद हमेशा हाशिए पर रहेंगे।



