New Delhi : कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर फॉर्म 6 के दुरुपयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि नए वोटरों को जोड़ने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हो रही है, जिससे मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका है।
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लेकिन सवाल उठता है — आखिर ये फॉर्म 6 है क्या?
फॉर्म 6 चुनाव आयोग द्वारा जारी एक आधिकारिक दस्तावेज़ है, जो भारत के नागरिकों को वोटर आईडी कार्ड प्राप्त करने और मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया के लिए उपयोग होता है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए होता है जो 18 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं या किसी नए क्षेत्र में शिफ्ट हुए हैं और वहां अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं।
ऑनलाइन प्रक्रिया सरल है: वोटर पोर्टल पर लॉगिन कर ‘फॉर्म 6’ भरना होता है, जिसमें व्यक्तिगत विवरण, फोटो और आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड किए जाते हैं। इसके बाद बीएलओ या ईआरओ द्वारा वेरिफिकेशन किया जाता है। अगर सब सही पाया गया, तो व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में जुड़ जाता है।
फॉर्म 6 का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का पहला कदम है। चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटाइजेशन और आधार वेरिफिकेशन जैसे उपाय किए हैं।
हालांकि, राहुल गांधी का आरोप है कि कुछ इलाकों में फॉर्म 6 का दुरुपयोग हो रहा है, जिससे गलत तरीके से नए वोटर जोड़े जा रहे हैं या पुरानों को हटाया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है।
हाल ही में चुनाव आयोग ने बिहार में प्रारूप मतदाता सूची जारी करते हुए कहा है कि बिना कारण किसी वोटर को हटाया नहीं जाएगा और 91.32% फॉर्म्स को डिजिटाइज किया जा चुका है। फिर भी राहुल गांधी के ये आरोप चुनावी माहौल को गर्मा सकते हैं।

