New Delhi : सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2 दिसंबर को रोहिंग्या मुसलमानों के कानूनी और मानवीय दर्जे को लेकर की गई टिप्पणी पर न्यायिक और कानूनी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पूर्व न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और ‘कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स’ से जुड़े सदस्यों ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर इस टिप्पणी पर गहरी आपत्ति जताई है।
पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अमानवीय होने के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, उसके मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है। हस्ताक्षरकर्ताओं के अनुसार, संवैधानिक अदालत से इस तरह की भाषा न्याय की भावना को कमजोर करती है।
📌 विवाद की पृष्ठभूमि
दरअसल, सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था कि “यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से भारत में प्रवेश करता है, तो क्या उसे रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया जाना चाहिए, जबकि देश के अपने नागरिक गरीबी में जी रहे हैं?”
इसी टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
🌍 रोहिंग्या समुदाय पर चिंता
पत्र में कहा गया है कि रोहिंग्या समुदाय दुनिया के सबसे अधिक उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों में शामिल है, जिन्हें म्यांमार में दशकों से हिंसा, भेदभाव और नागरिकता से वंचित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों और अदालतों ने म्यांमार में रोहिंग्याओं पर हुई कार्रवाई को नरसंहार और जातीय सफाए से जोड़कर देखा है।
हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि ऐसे समुदाय को केवल “अवैध घुसपैठिया” कहना न्यायपालिका की नैतिक साख को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सीजेआई के शब्द केवल अदालत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि निचली अदालतों, हाईकोर्ट और प्रशासन तक प्रभाव डालते हैं।
⚖️ अदालत में केंद्र की दलील
इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि याचिका किसी प्रत्यक्ष पीड़ित की ओर से नहीं, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दाखिल की गई है, इसलिए उसका लोकस स्टैंडी नहीं बनता।
वहीं याचिकाकर्ता रीता मनचंदा ने 2020 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि रोहिंग्याओं को केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही डिपोर्ट किया जा सकता है।
यह विवाद अब न्यायपालिका की संवेदनशील भूमिका, मानवाधिकार और संवैधानिक नैतिकता पर एक नई राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है।



