New Delhi : राजधानी दिल्ली में घने कोहरे की वजह से हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कम विजिबिलिटी के कारण दिल्ली आने-जाने वाली कई उड़ानों में देरी हो रही है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात को देखते हुए इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर कैट-3 (CAT-III) लैंडिंग प्रक्रियाएं लागू कर दी गई हैं।
✈️ क्या है कैट-3 प्रणाली?
कैट-3 एक उन्नत इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) है, जो अत्यंत कम विजिबिलिटी की स्थिति में भी विमानों को सुरक्षित रूप से उतरने की अनुमति देता है। जब घना कोहरा इतना बढ़ जाता है कि पायलट को कॉकपिट से रनवे दिखाई नहीं देता, तब इस प्रणाली के जरिए विमान पूरी तरह तकनीकी उपकरणों के सहारे लैंड करता है।
हालांकि, कैट-3 के तहत लैंडिंग के लिए कुछ शर्तें जरूरी होती हैं—
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विमान कैट-3 से लैस होना चाहिए
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पायलट विशेष रूप से प्रशिक्षित और प्रमाणित होना चाहिए
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रनवे पर हाई-इंटेंसिटी लाइटिंग और जरूरी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए
🌫️ क्यों लागू करनी पड़ती हैं लो-विजिबिलिटी प्रक्रियाएं?
जब अचानक विजिबिलिटी बेहद कम हो जाती है, तब एयरपोर्ट ‘लो-विजिबिलिटी प्रोसीजर’ (LVP) लागू करता है। इसके तहत तय किया जाता है कि कौन-सी उड़ानें उतर सकती हैं, किन पायलटों को अनुमति है और किन विमानों को होल्ड या डायवर्ट किया जाएगा।
🔍 डिसीजन हाइट और रनवे विजुअल रेंज क्या होती है?
कैट-3 सिस्टम में दो तकनीकी शब्द बेहद अहम होते हैं—
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डिसीजन हाइट (DH): वह ऊंचाई जहां पायलट को तय करना होता है कि लैंड करना है या विमान को वापस ऊपर ले जाना है। कैट-3 में यह 100 फीट से कम या शून्य भी हो सकती है।
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रनवे विजुअल रेंज (RVR): रनवे पर लगी लाइटों या मार्किंग को पायलट कितनी दूरी तक देख पा रहा है, इसे RVR कहते हैं।
कैट-3 को आगे कैट-3A, कैट-3B और कैट-3C जैसी उप-श्रेणियों में बांटा गया है, जो अलग-अलग विजिबिलिटी स्थितियों में ऑपरेशन की अनुमति देती हैं।
🚨 यात्रियों के लिए जरूरी सलाह
कैट-3 प्रक्रियाएं लागू होने के बाद IndiGo और Air India जैसी एयरलाइनों ने यात्रियों को संभावित देरी को लेकर अलर्ट जारी किया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरलाइन या एयरपोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट और ऐप के जरिए अपनी फ्लाइट की स्थिति की जानकारी लेते रहें।
हालांकि कैट-3 तकनीक की मदद से घने कोहरे में भी उड़ान संचालन संभव हो पाता है, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इसमें देरी होना सामान्य माना जाता है।



