खरसावां गोलीकांड के शहीदों को मिलेगा सम्मान: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

सरायकेला। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया है कि खरसावां गोलीकांड के शहीद अब गुमनामी में नहीं रहेंगे। गुआ गोलीकांड की तर्ज पर राज्य सरकार जल्द ही एक कमेटी का गठन करेगी, जो शहीदों की पहचान कर उनके आश्रितों को सम्मानित करेगी। इसके

खरसावां गोलीकांड के शहीदों को मिलेगा सम्मान: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

सरायकेला। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया है कि खरसावां गोलीकांड के शहीद अब गुमनामी में नहीं रहेंगे। गुआ गोलीकांड की तर्ज पर राज्य सरकार जल्द ही एक कमेटी का गठन करेगी, जो शहीदों की पहचान कर उनके आश्रितों को सम्मानित करेगी। इसके लिए न्यायिक जांच आयोग भी बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री गुरुवार को खरसावां शहीद स्थल पहुंचे और वहां शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अगले शहीद दिवस तक शहीदों की पहचान कर उन्हें पूरा सम्मान दिया जाएगा। हेलीपैड पर गार्ड ऑफ ऑनर लेने से इनकार करते हुए उन्होंने सीधे शहीद स्थल जाकर उन्हें नमन किया।

हेमंत सोरेन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 1 जनवरी पूरी दुनिया के लिए नया साल है, लेकिन झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, किसान और मजदूरों के लिए यह शहीद दिवस है। नए साल के जश्न के बीच झारखंड के लोग अपने शहीदों को याद करते हैं, यही इस राज्य की पहचान और इतिहास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का इतिहास संघर्ष और बलिदान से भरा हुआ है। कोल्हान, संताल, छोटानागपुर या पलामू—हर क्षेत्र में शहीदों की गाथाएं बिखरी हैं। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए वीर सपूतों ने अपनी जान दी। अंग्रेजी शासन हो या बाद का दौर, झारखंड के लोग हमेशा अन्याय का विरोध करते आए हैं। खरसावां गोलीकांड इसी संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल है।

सोरेन ने बताया कि सरकार ने शहीदों की खोज और सम्मान के लिए मसौदा तैयार कर लिया है। इसे पूरी तरह समझने और संतुष्ट होने के बाद लागू किया जाएगा। इसके लिए रिटायर जजों को शामिल करते हुए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जाएगा, ताकि किसी शहीद या उनके परिवार के साथ अन्याय न हो। सरकार शहीदों के सम्मान के साथ-साथ उनके परिजनों के अधिकारों के लिए भी प्रतिबद्ध है।

सभा में मंत्री दीपक बिरुआ, सिंहभूम की सांसद जोबा मांझी, खरसावां के विधायक दशरथ गागराई, ईचागढ़ की विधायक सविता महतो और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री का स्वागत शहीद स्मारक समिति की ओर से किया गया।

विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि खरसावां गोलीकांड आजाद भारत के सबसे बड़े गोलीकांडों में से एक है। आजादी के महज साढ़े चार महीने बाद 1 जनवरी 1948 को ओडिशा में खरसावां को शामिल करने के फैसले का विरोध कर रहे आदिवासियों पर पुलिस ने गोलियां चलाई, जिसमें कई निर्दोष मारे गए। तभी से आदिवासी समाज 1 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाता है।


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