आरटीआई से बड़ा सच बेनकाब: पकरी बरवाडीह परियोजना से 34 गांव प्रभावित
NTPC ने पहली बार जारी की आधिकारिक नामवार सूची, विस्थापन की तस्वीर साफ
Badkagaon : वर्षों से विवाद, विरोध और दावों के बीच घिरी पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। NTPC Limited ने पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि इस परियोजना से कुल 34 गांव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।

यह जानकारी NTPC के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) द्वारा आरटीआई के जवाब में लिखित रूप से दी गई है। यह आरटीआई आवेदन ग्राम जुगरा निवासी नेपुल कुमार द्वारा भारत सरकार के RTI पोर्टल के माध्यम से दायर किया गया था।
📄 RTI के जवाब में पहली बार साफ हुई वास्तविक स्थिति
RTI आवेदन संख्या NTPCO/R/E/26/00075 के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में NTPC ने प्रभावित गांवों की नामवार आधिकारिक सूची उपलब्ध कराई है। इससे परियोजना क्षेत्र में विस्थापन, पुनर्वास और प्रभाव की वास्तविक स्थिति पहली बार दस्तावेज़ों में स्पष्ट हुई है।
🏘️ NTPC द्वारा प्रभावित माने गए 34 गांव
आरटीआई के जवाब में जिन गांवों को प्रभावित बताया गया है, उनमें शामिल हैं—
इटिज, चिरूडीह, नगाड़ी, डाड़ीकला, चेपाकला, आराहरा, पकरी बरवाडीह, सिंदुआरी, सोमबर्सा, चुरचू, जुगरा, चेपाकलां, केरी, लंगातु, देवरीखुर्द, उरुब, बरकागांव, देवरीकला, लाकुरा, बेलतु, कंडाबेर, बरातू, जबरा, बसारिया, नवाडीह, सिरमा, ढेंगा, ठांग, बांका, बनादाग, कुसुम्भा, कटकमदाग, पसाल, सिकरी और गरिकला।
✍️ CPIO के हस्ताक्षर, अपील का भी प्रावधान
RTI के इस जवाब पर NTPC लिमिटेड के CPIO विकास कुमार के हस्ताक्षर हैं। पत्र में यह भी उल्लेख है कि यदि आवेदक उत्तर से संतुष्ट नहीं है तो वह 30 दिनों के भीतर प्रथम अपील कर सकता है। अपीलीय प्राधिकारी के रूप में रश्मि रंजन परिदा, अपीलीय प्राधिकारी, NTPC लिमिटेड, नोएडा का नाम दर्ज है।
🗣️ ग्रामीणों के दावों को मिला दस्तावेज़ी आधार
इस RTI खुलासे से पुनर्वास, मुआवजा, भूमि अधिग्रहण और रोजगार से जुड़े मुद्दे फिर केंद्र में आ गए हैं। प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से परियोजना का असर झेल रहे थे, लेकिन अब तक कई गांवों को आधिकारिक रूप से प्रभावित नहीं माना गया था।
अब इस RTI जवाब ने ग्रामीणों के दावों को मजबूत दस्तावेज़ी आधार दे दिया है।
⚖️ आंदोलन और कानूनी लड़ाई को मिल सकता है नया आधार
स्थानीय सामाजिक संगठनों और जानकारों का मानना है कि NTPC द्वारा जारी यह नामवार सूची भविष्य में आंदोलन, पुनर्वास नीति की समीक्षा और कानूनी लड़ाई में एक अहम दस्तावेज़ साबित हो सकती है। परियोजना क्षेत्र में इस खुलासे को एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।


