बदल रहा शादी का ट्रेंड: औसत विवाह आयु 29 वर्ष, दूसरी शादी के इच्छुक लोगों में 43% की बढ़ोतरी

New Delhi : भारत में शादी को लेकर लोगों की सोच और प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। बीते एक दशक में अविवाहित लोगों के बीच शादी की औसत उम्र 27 से बढ़कर 29 वर्ष हो गई है, वहीं दूसरी शादी करने के इच्छुक लोगों

बदल रहा शादी का ट्रेंड: औसत विवाह आयु 29 वर्ष, दूसरी शादी के इच्छुक लोगों में 43% की बढ़ोतरी
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New Delhi : भारत में शादी को लेकर लोगों की सोच और प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। बीते एक दशक में अविवाहित लोगों के बीच शादी की औसत उम्र 27 से बढ़कर 29 वर्ष हो गई है, वहीं दूसरी शादी करने के इच्छुक लोगों की संख्या में 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह खुलासा एक हालिया अध्ययन रिपोर्ट में हुआ है।

📊 2016 से 2025 के रुझानों का विश्लेषण

रिपोर्ट में वर्ष 2016 से 2025 के बीच उपयोगकर्ता रुझानों का विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही 2026 में 30,000 से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं से प्राप्त सर्वेक्षण डेटा को भी शामिल किया गया। अध्ययन के अनुसार, जीवनसाथी की तलाश शुरू करने वाले लोगों की औसत उम्र अब 29 वर्ष हो चुकी है। वर्तमान में 50 प्रतिशत उपयोगकर्ता 29 साल की उम्र में विवाह की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे वित्तीय स्थिरता, करियर में तरक्की और मानसिक रूप से शादी के लिए तैयार होना जैसे प्रमुख कारण हैं।

💍 दूसरी शादी को लेकर बढ़ी स्वीकार्यता

रिपोर्ट में दूसरी शादी को लेकर समाज में बढ़ती स्वीकार्यता भी सामने आई है।

  • वर्ष 2016 में 11 प्रतिशत उपयोगकर्ता दूसरी शादी की तलाश में थे

  • जबकि 2025 तक यह आंकड़ा 16 प्रतिशत पहुंच गया

यह दस वर्षों में 43 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। खास बात यह है कि अब 15 प्रतिशत ऐसे लोग, जिन्होंने कभी शादी नहीं की, वे भी तलाकशुदा प्रोफाइल में रुचि दिखा रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि समाज में तलाक को लांछन मानने की सोच धीरे-धीरे कमजोर हो रही है।

🔻 जाति की प्राथमिकता में बड़ी गिरावट

अध्ययन में यह भी सामने आया कि शादी में जाति को सख्त मानदंड मानने वालों की संख्या में भारी कमी आई है।

  • 2016 में 91 प्रतिशत उपयोगकर्ता जाति को गैर-समझौता योग्य मानते थे

  • वहीं 2025 में यह आंकड़ा घटकर 54 प्रतिशत रह गया

यह बदलाव दर्शाता है कि युवा पीढ़ी अब रिश्तों में आपसी समझ, सोच और जीवन मूल्यों को ज्यादा महत्व दे रही है।

👉 कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत में विवाह को लेकर पारंपरिक सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है और लोग अब अधिक व्यावहारिक, स्वतंत्र और खुले विचारों के साथ जीवनसाथी चुन रहे हैं।

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