New Delhi : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम, पढ़ाई और ट्रैफिक के चलते लोगों के पास खाना बनाने का समय कम होता जा रहा है। इसी वजह से रेडी-टू-ईट और पैकेज्ड फूड का चलन तेजी से बढ़ा है। ये फूड कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाते हैं, जिससे लोगों के लिए यह आसान विकल्प बन गए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इनका लगातार सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
बाजार में मिलने वाले फ्लेवर दही, इंस्टेंट ओट्स, नूडल्स और फ्रोजन फूड को हेल्दी और स्वादिष्ट बताकर बेचा जाता है। इनके पैकेट पर ‘लो फैट’, ‘हाई फाइबर’ और ‘100 प्रतिशत नेचुरल’ जैसे दावे लिखे होते हैं, जिससे लोग इन्हें बेहतर विकल्प मान लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये दावे पूरी तरह सही नहीं होते।
इन फूड प्रोडक्ट्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इनमें प्रिजर्वेटिव्स, अधिक मात्रा में नमक, शुगर और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं। अधिक नमक का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है, जबकि ज्यादा शुगर वजन बढ़ाने के साथ-साथ डायबिटीज का खतरा भी बढ़ा देती है।
इसके अलावा, प्रोसेसिंग के दौरान इनमें मौजूद जरूरी विटामिन और मिनरल्स काफी हद तक खत्म हो जाते हैं। ऐसे में ये फूड पेट तो भर देते हैं, लेकिन शरीर को जरूरी पोषण नहीं दे पाते।
डॉक्टरों का कहना है कि नियमित रूप से पैकेज्ड फूड खाने से लोगों की खाने की आदतें भी बदल जाती हैं। धीरे-धीरे घर का बना ताजा खाना फीका लगने लगता है, जो लंबे समय में सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार पैकेज्ड फूड खाना नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसे रोजाना की आदत बनाना सही नहीं है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि लोग अधिक से अधिक ताजा और घर का बना भोजन खाएं और संतुलित आहार अपनाएं।



