Ranchi : राजधानी रांची के धुर्वा स्थित सेक्टर-3 एन टाइप धूमकुड़िया परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में धर्मांतरित ईसाइयों के जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने की मांग को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया गया। प्रेस वार्ता में बताया गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न न्यायिक निर्णयों के आलोक में 14 मई 2026 को झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका अधिवक्ता राजीव कुमार एवं नितेश्वरी कुमारी के माध्यम से दाखिल की गई।
याचिका में उदाहरण के तौर पर शिल्पी नेहा तिर्की का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उनके शपथ पत्र में जाति “उरांव” तथा धर्म “ईसाई” दर्ज है। प्रेस वार्ता में दावा किया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों, विशेषकर “सी. सेल्वा रानी बनाम विशेष सचिव सह जिला कलेक्टर एवं अन्य-2024” में स्पष्ट कहा गया है कि ईसाई धर्म जाति व्यवस्था को मान्यता नहीं देता तथा धर्म परिवर्तन के बाद जातिगत पहचान समाप्त हो जाती है।
वक्ताओं ने कहा कि “के.पी. मन्नू बनाम अध्यक्ष जांच समिति” एवं अन्य न्यायिक टिप्पणियों का हवाला देते हुए धर्मांतरित ईसाइयों के जाति प्रमाण पत्रों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इस संबंध में पहले राज्य के मुख्य सचिव, कार्मिक सचिव, उपायुक्त रांची एवं अंचलाधिकारी रातू को आवेदन दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रेस वार्ता में मौजूद लोगों ने इसे आदिवासी अधिकार, परंपरा और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की। कार्यक्रम में संदीप उरांव, सोमा उरांव, विनोद कच्छप, जगन्नाथ भगत, जय मंत्री उरांव समेत कई लोग उपस्थित थे।



