Lohardaga : झारखंड के लोहरदगा जिले में बेटे की चाह और अंधविश्वास के चलते अपनी आठ वर्षीय इकलौती बेटी की हत्या करने वाले पिता को अदालत ने सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। छह वर्ष पुराने इस चर्चित मामले में लोहरदगा सिविल कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकमल मिश्रा की अदालत ने आरोपी सुमन नगेशिया को दोषी करार देते हुए मंगलवार को फैसला सुनाया। अदालत ने उसे सश्रम आजीवन कारावास के साथ 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
लोक अभियोजक भरत राम के अनुसार, मामला पेशरार थाना क्षेत्र का है। आरोपी सुमन नगेशिया की केवल एक बेटी थी, लेकिन वह पुत्र की चाह रखता था। इसी चाहत ने उसे अंधविश्वास की राह पर धकेल दिया। जांच में सामने आया कि उसकी मुलाकात झाड़-फूंक और ओझा-गुनी का काम करने वाले डेमच नगेशिया से हुई थी। आरोप है कि डेमच ने उसे पुत्र प्राप्ति के लिए अपनी बेटी की बलि देने के लिए उकसाया। अंधविश्वास और अशिक्षा के प्रभाव में आकर आरोपी ने इस बात पर विश्वास कर लिया और अपनी ही बेटी की हत्या की साजिश रच डाली।
घटना 11 नवंबर 2020 की है। उस दिन आरोपी की पत्नी फुलमनिया नगेशिया काम के सिलसिले में घर से बाहर गई हुई थीं। घर में केवल पिता और उसकी आठ वर्षीय मासूम बेटी मौजूद थे। इसी दौरान आरोपी ने टांगी से हमला कर अपनी बेटी की निर्मम हत्या कर दी।
घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में मृत बच्ची की मां फुलमनिया नगेशिया ने अपने पति के खिलाफ पेशरार थाने में हत्या का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने कांड संख्या 14/2020 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और हत्या में प्रयुक्त खून से सनी टांगी भी बरामद की। पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मृतका की मां, चिकित्सक, अनुसंधान अधिकारी समेत 11 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए। अदालत ने सभी गवाहों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध पाया।
इसके बाद न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत सुमन नगेशिया को दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
इस फैसले के साथ छह वर्ष पहले अपने ही पिता की अंधविश्वास भरी सोच का शिकार बनी मासूम बच्ची को न्याय मिला है।



