Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID को पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच के केंद्र में JPSC परीक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) और उससे जुड़े कथित लेन-देन हैं।
CID के अनुसार, TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने अपने कथित स्वीकारोक्ति बयान में दावा किया है कि JPSC का काम दिलाने के लिए आयोग के पूर्व अध्यक्ष और झारखंड सरकार के पूर्व मुख्य सचिव, सेवानिवृत्त IAS अधिकारी एल. खियांगते के साथ कथित तौर पर ₹2 करोड़ में सौदा तय हुआ था। हालांकि, ये आरोप जांच में सामने आए बयान पर आधारित हैं और इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।
20% कमीशन का भी आरोप
अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, TDPL को परीक्षा संचालन का काम दिलाने के बदले एजेंसी के बिलों की करीब 20 प्रतिशत राशि कमीशन के रूप में देने की शर्त रखी गई थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, TDPL के अधिकारियों और JPSC से जुड़े लोगों के बीच कई मुलाकातें हुईं। इनमें रांची के एक होटल, मोरहाबादी मैदान और स्टेट गेस्ट हाउस में हुई कथित बैठकों का भी उल्लेख किया गया है।
धर्मेंद्र कुमार की भूमिका भी जांच के घेरे में
CID ने इससे पहले झारखंड के मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत धर्मेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि उसकी गिरफ्तारी अभय तिवारी के बयान में सामने आई जानकारी के आधार पर हुई।
अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार ने TDPL को JPSC से जुड़े OTR, OMR, एडमिट कार्ड, उपस्थिति पंजी और प्रिंटिंग जैसे काम दिलाने का भरोसा दिया था। इसके बदले कथित तौर पर ₹20 से ₹25 लाख कमीशन की मांग की गई थी।
CID के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार ने कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने का कथित आश्वासन भी दिया था। इसके बाद यह जानकारी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह तक पहुंचाई गई और कथित तौर पर शर्त स्वीकार कर ली गई।
पूर्व JPSC चेयरमैन से मुलाकात का भी दावा
जांच में सामने आए कथित बयान के अनुसार, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और सत्यपाल सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी तथा आनंद उर्फ सानंद प्रकाश की मुलाकात पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते से हुई थी।
बताया गया है कि यह मुलाकात रांची के रेडिसन ब्लू होटल में हुई थी। इसके बाद एजेंसी ने JPSC अध्यक्ष और सदस्यों के सामने अपनी प्रस्तुति दी।
CID के मुताबिक, इसके बाद TDPL के अधिकारियों की धर्मेंद्र कुमार से दोबारा मुलाकात हुई, जहां कथित तौर पर ₹2 करोड़ और कमीशन से संबंधित शर्तों की जानकारी दी गई।
सीट के बदले लाखों रुपये मिलने का दावा
अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, एजेंसी के स्तर पर यह माना गया था कि JPSC की एक सीट के बदले ₹30 से ₹40 लाख तक की रकम मिल सकती है। इसी वजह से कथित कमीशन की शर्त स्वीकार कर ली गई।
बाद में स्टेट गेस्ट हाउस में एल. खियांगते के साथ बैठक होने और धर्मेंद्र कुमार के संपर्क में रहने को कहे जाने का भी दावा किया गया है।
जून 2025 में TDPL को मिला था ठेका
जांच के अनुसार, इन घटनाक्रमों के बाद जून 2025 में TDPL को JPSC परीक्षाओं के संचालन का ठेका मिला था।
इसके बाद 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ी। प्रारंभिक परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 9 मार्च 2026 की गई थी। परीक्षा में कुल 103 पदों पर भर्ती होनी थी।
8 अप्रैल 2026 को प्रारंभिक परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी किया गया और 19 अप्रैल 2026 को परीक्षा आयोजित हुई। इसके बाद 2 जुलाई 2026 को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी किया गया, जिसमें 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया।
परिणाम सामने आने के बाद परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद शुरू हुआ। CID अब पूरे मामले में कथित नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन, परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों और अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच कर रही है।










