- ‘क्या राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में पढ़ना गुनाह है?—खोरठा साहित्य संस्कृति परिषद ने कहा, तथ्यों की निष्पक्ष जांच के बाद ही बने राय
मुकेश रंजन
Ranchi : राधा गोविन्द विश्वविद्यालय को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रही खबरों पर खोरठा साहित्य संस्कृति परिषद, रांची के प्रभारी अनाम अजनबी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान से जुड़ी खबर प्रकाशित करते समय तथ्यों की निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को सामने रखना जरूरी है। कुछ आरोपों के आधार पर पूरे विश्वविद्यालय और वहां अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों की मेहनत पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
अनाम अजनबी ने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में पढ़ना कोई गुनाह है? क्या प्रतियोगिता परीक्षा में सफल होना गुनाह है?” उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए राजधानी रांची में रहकर उच्च शिक्षा हासिल करना आसान नहीं है। ऐसे में रामगढ़ जैसे क्षेत्र में उच्च शिक्षा का अवसर मिलना झारखंड के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से विद्यार्थी विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं। वर्षों तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों का विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार हासिल करना और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। महिला पर्यवेक्षक की नियुक्ति में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के चयन को केवल संदेह की दृष्टि से देखने के बजाय उनकी मेहनत और शिक्षा के परिणाम के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
खोरठा की पढ़ाई को बताया अहम पहलू :
अनाम अजनबी ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के बाद राधा गोविन्द विश्वविद्यालय झारखंड के चुनिंदा विश्वविद्यालयों में शामिल है, जहां खोरठा की पढ़ाई होती है। खोरठा झारखंड की प्रमुख और व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। ऐसे में जिन विद्यार्थियों ने वर्षों तक खोरठा विषय का अध्ययन किया है, उनके खोरठा से संबंधित प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों में बेहतर प्रदर्शन की संभावना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का चयन अपने आप में किसी घोटाले का प्रमाण नहीं हो सकता। यह उनकी मेहनत, तैयारी और शिक्षा का परिणाम भी हो सकता है। हालांकि, यदि किसी मामले में वास्तविक शिकायत या अनियमितता सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूर होनी चाहिए।
‘खबरों का मकसद सुधार हो, विद्यार्थियों का मनोबल तोड़ना नहीं’ :
अनाम अजनबी ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले ही पूरे विश्वविद्यालय, शिक्षकों और विद्यार्थियों को संदेह के घेरे में रखना उचित नहीं है। समाचारों का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार और वास्तविक तथ्यों को सामने लाना होना चाहिए, न कि सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा हासिल कर अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हजारों विद्यार्थियों का मनोबल तोड़ना।
उन्होंने कहा कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, लेकिन विद्यार्थियों की उपलब्धियों को भी तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही परखा जाए।










