- बिहार पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले 5 हजार से अधिक संदिग्ध म्यूल खाते चिह्नित किए हैं। पटना और चंपारण क्षेत्र में सबसे अधिक मामले मिले हैं।
Patna : बिहार में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (सीसीएसयू) ने राज्य में पांच हजार से अधिक संदिग्ध म्यूल खाते चिह्नित किए हैं। इनमें पटना और चंपारण क्षेत्र में सबसे अधिक खाते मिले हैं। राज्य में चिह्नित कुल म्यूल खातों में 30 प्रतिशत से अधिक इसी क्षेत्र से जुड़े हैं।
सीसीएसयू के अनुसार, इस वर्ष जुलाई तक साइबर ठगी की 104.05 करोड़ रुपये की राशि होल्ड कराई गई है, जो कुल ठगी गई रकम का करीब 30 प्रतिशत है। वहीं, 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पीड़ितों को रिफंड भी कराई गई है। वर्ष 2025 में 116 करोड़ रुपये की ठगी की राशि होल्ड की गई थी।
पटना में सबसे अधिक 672 संदिग्ध म्यूल खाते
जिलावार आंकड़ों में पटना सबसे ऊपर है, जहां 672 संदिग्ध म्यूल खाते चिह्नित किए गए हैं। इसके बाद मोतिहारी में 509 और बेतिया में 454 संदिग्ध खाते मिले हैं।
अन्य जिलों में नालंदा में 325, सारण में 256, गया और मधेपुरा में 183-183, भागलपुर में 150, मुजफ्फरपुर में 141 और सिवान में 125 संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान की गई है।
सीसीएसयू के अनुसार, देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाली साइबर ठगी की रकम बिहार में खोले गए म्यूल खातों के जरिए निकाले जाने की शिकायतें सामने आई हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर मार्च तक ऐसी 1272 शिकायतें मिली थीं, जिनमें 72 करोड़ रुपये की ठगी की जानकारी सामने आई है।
22 बैंक शाखाएं जांच के घेरे में, चार बैंककर्मी गिरफ्तार
सीसीएसयू अब इन म्यूल खातों को खोलने में बैंककर्मियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। ऐसी 22 बैंक शाखाओं को चिह्नित किया गया है, जहां सबसे अधिक म्यूल खातों से जुड़ी शिकायतें मिली हैं।
मामले में अब तक चार बैंककर्मियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें पटना, कटिहार, भोजपुर और भागलपुर के एक-एक बैंककर्मी शामिल हैं।
डीआइजी सीसीएसयू अवकाश कुमार ने बताया कि म्यूल खातों के विरुद्ध लगातार विशेष अभियान साइबर प्रहार चलाकर कार्रवाई की जा रही है। सीसीएसयू की टीम जिलावार सूची तैयार कर संदिग्ध खातों की जांच कर रही है। इस मामले में करीब सौ गिरफ्तारियां की गई हैं और अब तक चार बैंककर्मी भी पकड़े गए हैं।
साइबर प्रहार अभियान में 5 हजार से अधिक खाते चिह्नित
विशेष अभियान के दौरान साइबर प्रहार 2.0 में 1215 और साइबर प्रहार 3.0 में 536 म्यूल खाते चिह्नित किए गए। जुलाई तक चले विशेष अभियान साइबर प्रहार 4.0 में 3177 संदिग्ध म्यूल खाते सामने आए।
इन खातों की जांच के आधार पर अब तक 143 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जबकि 99 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।
कैसे काम करते हैं म्यूल खाते?
साइबर अपराधी कई बार आर्थिक रूप से कमजोर या अनजान लोगों से उनके बैंक खाते किराये पर लेते हैं। ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद खाताधारक को टोकन मनी देकर पैसा निकाल लिया जाता है।
इसके बाद ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़े पैसों के लेन-देन के लिए किया जाता है। राजधानी पटना के संपतचक और आसपास के इलाकों में म्यूल खातों से जुड़ी अधिक शिकायतें सामने आई हैं।



