- उत्तराखंड में 452 मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता और विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी, करीब 200 आवेदन मिले हैं।
Dehradun : उत्तराखंड सरकार ने मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। राज्य में अब उन्हीं मदरसों का संचालन हो सकेगा, जो निर्धारित मानकों को पूरा कर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता हासिल करेंगे और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होंगे। बिना मान्यता चल रहे संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर उन्हें बंद किया जाएगा।
राज्य में पहले उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में पंजीकृत रहे 452 मदरसों को अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। इनमें से करीब 200 मदरसों ने अब तक मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। आवेदनों के आधार पर संबंधित संस्थानों का स्थलीय निरीक्षण कराया जा रहा है।
रुद्रपुर के मामले के बाद बढ़ी सख्ती
मदरसों को लेकर सरकार की सख्ती के बीच रुद्रपुर में जश्न-ए-मोहम्मदी जुलूस के दौरान त्रिशूल चौक पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला भी सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में संबंधित मौलवी को गिरफ्तार किया था।
इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित मदरसे को सील कर दिया था। प्रशासन के अनुसार, मदरसा निर्धारित मान्यता के बिना संचालित हो रहा था और लागू नियमों का पालन नहीं कर रहा था।
धामी बोले- नियमों से समझौता नहीं होगा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाली किसी भी गतिविधि के प्रति सरकार की सख्त नीति दोहराई है। उन्होंने कहा कि देवभूमि में ऐसी शिक्षा व्यवस्था को स्थान नहीं दिया जाएगा, जो कट्टरता को बढ़ावा दे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से बनाए गए नियम-कानून सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे। इनका पालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
मान्यता के लिए किन मानकों की होगी जांच?
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि प्रदेश में पूर्व में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में पंजीकृत 452 मदरसों को अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत मान्यता लेनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता नहीं लेने वाले मदरसों को संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि मान्यता के लिए मदरसों को भवन, कक्षों की क्षमता, विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था, बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की जानकारी देनी होगी।
इसके साथ ही मदरसा संचालकों से बैंक खातों और संस्थान को मिलने वाली आर्थिक सहायता का विवरण भी मांगा जाएगा। प्राधिकरण इन सभी पहलुओं की जांच के बाद मान्यता देने पर निर्णय करेगा।
राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और धार्मिक शिक्षा भी प्राधिकरण के दायरे में
सरकार ने मदरसों के लिए केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित व्यवस्था के बजाय औपचारिक शिक्षा व्यवस्था के मानकों को पूरा करना अनिवार्य किया है। अधिकारियों के अनुसार, मान्यता के साथ मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध करानी होगी।
प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि मदरसों में दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा से संबंधित पाठ्यक्रम भी प्राधिकरण द्वारा निर्धारित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का दायरा केवल मुस्लिम संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सिख, बौद्ध और ईसाई संस्थानों को भी इसके दायरे में शामिल किया जाएगा।
अब स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच के बाद यह तय होगा कि कौन से मदरसे नए मानकों पर खरे उतरते हैं और किन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



