नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित आतंकी साजिश के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। NIA की टीमों ने श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम में कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई उस मामले की जांच का हिस्सा है, जिसमें घाटी में सक्रिय आतंकियों को सीमा पार से मदद पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर उनके नेटवर्क को मजबूत करने के आरोपों की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी का फोकस केवल पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलरों तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर आतंकियों के लिए काम करने वाले कथित ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) भी NIA की जांच के दायरे में हैं। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सीमा पार से आने वाले आतंकियों को स्थानीय स्तर पर किस तरह की सहायता उपलब्ध कराई जाती थी।
पांच जिलों में एक साथ NIA की कार्रवाई
NIA ने श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम में अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी का उद्देश्य मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाना बताया गया है।जांच के दौरान एजेंसी उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है, जिन पर आतंकियों को स्थानीय स्तर पर मदद उपलब्ध कराने का संदेह है। अधिकारियों की जांच का एक अहम पहलू पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों और घाटी में मौजूद उनके संपर्कों के बीच संभावित नेटवर्क का पता लगाना है।
पाकिस्तान हैंडलरों के इशारे पर मदद का आरोप
NIA की जांच के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को स्थानीय मदद उपलब्ध कराने के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल करते हैं। आरोप है कि स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर इन आतंकियों को जरूरत के मुताबिक सामान और अन्य सहायता मुहैया कराते हैं।ऐसे नेटवर्क की पहचान सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे सीमा पार से आने वाले आतंकियों को घाटी में स्थानीय स्तर पर ठिकाना और दूसरी सुविधाएं मिलने की आशंका रहती है। NIA अब इसी पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े थे और इनके बीच संपर्क किस माध्यम से होता था।
FIR से शुरू हुई थी जांच
यह मामला श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 0024/2026 से जुड़ा है। बाद में NIA ने मामले को अपने स्तर पर दर्ज करते हुए यूए (पी) एक्ट समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत जांच शुरू की। मामले की शुरुआत इस साल 31 मार्च की देर रात एक नाका पॉइंट पर हुई कार्रवाई से बताई गई है। उस दौरान प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने के आरोपी एक ओवर ग्राउंड वर्कर को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, उसके कब्जे से एक हैंड ग्रेनेड और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और सीमा पार से संचालित कथित आतंकी साजिश से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने लगी।
जांच में पाकिस्तानी आतंकियों और स्थानीय नेटवर्क की कड़ी
जांच आगे बढ़ने के साथ एजेंसियों ने कथित तौर पर उन पाकिस्तानी आतंकियों की पहचान की, जो इस साजिश से जुड़े हुए थे। इसके साथ ही घाटी में मौजूद उन लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई, जिन पर आतंकियों को मदद पहुंचाने का आरोप है। NIA की ताजा छापेमारी को इसी नेटवर्क की परतें खोलने की कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज और डिजिटल सामग्री आगे की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
डिजिटल और भौतिक सबूत जुटाने पर जोर
NIA की कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य मामले से जुड़े डिजिटल और भौतिक साक्ष्य जुटाना है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्धों के बीच किस तरह संपर्क और समन्वय किया जाता था। जांच एजेंसी के लिए यह भी अहम है कि स्थानीय स्तर पर कथित मददगारों की भूमिका को ठोस सबूतों के आधार पर स्थापित किया जा सके। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और अन्य सामग्री की जांच की जा सकती है।
आतंकी नेटवर्क पर लगातार बढ़ रहा शिकंजा
जम्मू-कश्मीर में NIA की यह कार्रवाई सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क और उसके स्थानीय संपर्कों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है। सुरक्षा एजेंसियां अब केवल सक्रिय आतंकियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि उनके लिए कथित तौर पर जमीन तैयार करने और मदद उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की पहचान पर भी जोर दे रही हैं। ताजा छापेमारी के बाद अब जांच से जुड़े दस्तावेजों और बरामद सामग्री की पड़ताल की जाएगी। इससे मामले में शामिल अन्य संदिग्धों और नेटवर्क की अगली कड़ियों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।



