बिहार के 1.17 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचा पोषण माह अभियान, रोज होंगी कम से कम 5 गतिविधियां

बिहार में बच्चों और माताओं के बेहतर पोषण को लेकर राष्ट्रीय पोषण माह 2026 अभियान जोर पकड़ रहा है। 9 सितंबर से शुरू हुआ यह अभियान 8 अक्टूबर तक चलेगा। इस वर्ष ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ को अभियान की थीम बनाया गया है।
बिहार के 1.17 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचा पोषण माह अभियान

Patna: बिहार में बच्चों और माताओं के बेहतर पोषण को लेकर राष्ट्रीय पोषण माह 2026 अभियान जोर पकड़ रहा है। 9 सितंबर से शुरू हुआ यह अभियान 8 अक्टूबर तक चलेगा। इस वर्ष ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ को अभियान की थीम बनाया गया है। इसके तहत राज्य के सभी 38 जिलों में पोषण और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। बिहार के 1,17,672 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और उनके परिवारों तक पोषण से जुड़ी जानकारी और सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य पोषण को केवल सरकारी योजना न बनाकर परिवार और समुदाय की जिम्मेदारी से जोड़ना है, ताकि खान-पान और स्वास्थ्य से जुड़े व्यवहार में स्थायी बदलाव लाया जा सके।

रोजाना कम से कम पांच गतिविधियां होंगी

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पोषण माह के दौरान निर्धारित गतिविधि कैलेंडर के तहत हर दिन कम से कम पांच कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त गतिविधियां भी कराई जा सकती हैं। इन कार्यक्रमों की जानकारी और रोजाना की उपलब्धियों का रिकॉर्ड जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर अपलोड किया जा रहा है। इससे अभियान के तहत होने वाली गतिविधियों की निगरानी और प्रगति का आकलन किया जा रहा है।

पोषण माह में इन पांच विषयों पर खास जोर

इस बार अभियान में बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें खास तौर पर शामिल हैं:

  • आहार में विविधता और पर्याप्त प्रोटीन
  • आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताजा और गर्म पका भोजन
  • समुदाय की भागीदारी और जवाबदेही
  • बच्चों के पोषण के साथ प्रारंभिक विकास और उद्दीपन
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के जरिए मातृ स्वास्थ्य और पोषण को बढ़ावा देना

अभियान के दौरान परिवारों को संतुलित आहार, स्थानीय खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल और स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। बच्चों के शुरुआती विकास और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

गांवों में रैली से लेकर पोषण वाटिका तक

पोषण माह का अभियान केवल आंगनबाड़ी केंद्रों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों की मदद से भी पोषण संबंधी संदेश घर-घर पहुंचाया जा रहा है। जीविका से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की बैठकों में संतुलित भोजन, स्थानीय मोटे अनाज, एनीमिया से बचाव, स्तनपान, बच्चों के लिए ऊपरी आहार और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

इसके अलावा गांवों में कई तरह की गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • पोषण जागरूकता रैली
  • प्रभातफेरी
  • आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ समन्वय बैठक
  • पोषण वाटिका का विकास
  • परिवारों के बीच पोषण संबंधी जागरूकता

केवल अभियान नहीं, व्यवहार में बदलाव पर जोर

समाज कल्याण विभाग के अनुसार पोषण माह का उद्देश्य सिर्फ एक महीने तक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है। अभियान के जरिए परिवारों के खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी आदतों में लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव लाने पर जोर दिया जा रहा है। बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी, संतुलित भोजन, स्तनपान, पूरक आहार, स्वच्छता, मातृ पोषण और प्रारंभिक बाल विकास जैसे विषयों पर लगातार जागरूकता बढ़ाई जा रही है।

38 जिलों में पहुंच रहा पोषण का संदेश

बिहार के सभी 38 जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है। बड़ी संख्या में केंद्रों के जुड़ने से इसका सीधा संपर्क बच्चों, माताओं और परिवारों से हो रहा है। अभियान का फोकस इस बात पर है कि पोषण से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचने के साथ-साथ उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा भी बने। स्थानीय खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल, पौष्टिक भोजन, स्वच्छता और बच्चों की नियमित निगरानी जैसे छोटे कदमों के जरिए परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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