Gayaji: पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 को लेकर गयाजी को सजाने और संवारने का काम तेजी से चल रहा है। इस बार शहर की दीवारों और प्रमुख स्थानों को बिहार की पारंपरिक लोककला से सजाया जा रहा है। ‘पेंट द सिटी’ कार्यक्रम के तहत कलाकारों और विद्यार्थियों ने दीवारों पर मधुबनी और मंजूषा शैली की आकर्षक पेंटिंग बनाई है। इन चित्रों में पितृपक्ष, पिंडदान, गयासुर की तपस्या, भगवान विष्णु का आशीर्वाद और बिहार की सांस्कृतिक परंपराओं को जगह दी गई है। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले पितृपक्ष मेला महासंगम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में शहर की दीवारों पर बनाई गई ये पेंटिंग न केवल शहर की खूबसूरती बढ़ा रही हैं, बल्कि यहां आने वाले लोगों को बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति से भी परिचित करा रही हैं।
‘पेंट द सिटी’ से बदली शहर की दीवारों की तस्वीर
गयाजी जिला प्रशासन की पहल पर शुरू किए गए ‘पेंट द सिटी’ कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों और विद्यार्थियों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है। इसके लिए चयनित प्रतिभागियों को अलग-अलग दीवारें उपलब्ध कराई गईं और पेंटिंग से जुड़ी जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। मानपुर के लखीबाग की रहने वाली चाहत वत्स ने बताया कि इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें अपनी कला को बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने का मौका मिला। उन्होंने जिला प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उनके अनुसार कलाकारों के लिए पेंटिंग सामग्री के साथ-साथ नाश्ता, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई।

पेंटिंग के जरिए दिखा पितृपक्ष और गयाजी की धार्मिक विरासत
रामधनपुर, कबड़ापर, शिव मंदिर के पास की रहने वाली तान्या बताती हैं कि, “हम सभी का चयन ‘पेंट द सिटी’ कार्यक्रम के लिए किया गया था। डीएम सर ने हमारी पेंटिंग का चयन किया और हमें यह कार्य करने का अवसर दिया। हमें पेंटिंग बनाने के लिए एक दीवार दी गई और इसके लिए आवश्यक सभी सामग्री भी डीएम सर की ओर से उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा, समय-समय पर हमारे स्नैक्स और नाश्ते की भी पूरी व्यवस्था की जाती है।”

आगे वह बताती है कि, “यहां हमारी मैम भी हमेशा हमारे साथ रहती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि हमें किसी तरह की परेशानी न हो। हर प्लेटफॉर्म पर ऐसा अवसर नहीं मिलता। खासकर हम जैसे छोटे विद्यार्थियों को अपनी कला के माध्यम से आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा दिखाने का ऐसा मंच मिलना हमारे लिए बहुत बड़ी बात है। हमारे पीछे आप जो पेंटिंग देख रहे हैं, उसकी थीम ‘गयासुर की तपस्या और भगवान विष्णु का आशीर्वाद’ है। जिसमें दर्शाया गया है कि गयासुर ने किस प्रकार तपस्या की और भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया।”
“मैं आईआईएम बोधगया की छात्रा हूं। इसी साल मेरा यहां एडमिशन हुआ है। पितृ पक्ष के शुभ अवसर पर मैं अपनी टीम, आईआईएम की टीम के साथ पेंटिंग प्रतियोगिता में भाग लेने आई हूं। जैसा कि हम सभी जानते हैं, पितृपक्ष शुरू हो चुका है। यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण अवसर होता है, क्योंकि इस दौरान हम अपने पूर्वजों का पिंडदान और श्राद्ध कर सकते हैं। पितृ पक्ष में पिंडदान का विशेष महत्व गया जी का है। मैं इस बात को लेकर बहुत खुश हूं कि यहां के प्रशासन और डीएम सर ने हमें यह अवसर दिया कि हम इस पवित्र अवसर पर अपनी कला के माध्यम से पितृ पक्ष के महत्व को प्रदर्शित कर सकें।” विदुषी मौर्य बताती है ।

आगे वह बताती है कि, “यहां हम अपनी पेंटिंग के माध्यम से पितृपक्ष और पिंडदान की परंपरा को दर्शा रहे हैं। हमारी पेंटिंग में दशरथ जी के पिंडदान से जुड़ी कथा को प्रदर्शित किया गया है। हमारा उद्देश्य है कि पितृपक्ष का महत्व हमारी पेंटिंग के माध्यम से लोगों तक पहुंचे। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को हमारी पेंटिंग पसंद आए और हमारी कला के माध्यम से गया जी की सुंदरता में भी योगदान हो सके।”

