Patna: बिहार में पेपरलेस निबंधन प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। डिजिटल तरीके से दस्तावेज निबंधित कराने की सुविधा शुरू होने के बाद लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अनुसार, सितंबर के शुरुआती 15 दिनों में राज्यभर में करीब 12 हजार दस्तावेज पेपरलेस तरीके से निबंधित किए गए। इस प्रक्रिया से विभाग को 126 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल प्रतिदिन औसतन करीब एक हजार दस्तावेज डिजिटल माध्यम से निबंधित हो रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर रोजाना 1500 से अधिक हो सकता है।
जुलाई में शुरू हुई थी पेपरलेस निबंधन सुविधा
बिहार में पेपरलेस निबंधन की व्यवस्था जुलाई में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य निबंधन की प्रक्रिया को आसान, तेज और अधिक पारदर्शी बनाना है। शुरुआत में इसकी रफ्तार सीमित थी, लेकिन समय के साथ लोगों की भागीदारी बढ़ती गई। पहले महीने में करीब 1200 दस्तावेज पेपरलेस तरीके से निबंधित किए गए थे। इसके बाद अगस्त में इसमें बड़ा इजाफा हुआ और महीनेभर में 6700 से अधिक दस्तावेज डिजिटल माध्यम से निबंधित हुए। अगस्त में इस प्रक्रिया से विभाग को 85 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला। अब सितंबर के शुरुआती 15 दिनों में ही करीब 12 हजार दस्तावेज निबंधित होने से डिजिटल निबंधन की रफ्तार में तेजी साफ दिखाई दे रही है।
रोजाना 1000 से अधिक दस्तावेज हो रहे निबंधित
वर्तमान में पेपरलेस निबंधन के तहत रोजाना औसतन करीब एक हजार दस्तावेज दर्ज किए जा रहे हैं। विभाग का कहना है कि इस संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आने वाले सप्ताह में प्रतिदिन होने वाले पेपरलेस निबंधन का औसत 1500 के पार पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इससे संकेत मिलता है कि डिजिटल निबंधन व्यवस्था धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।
ई-निबंधन सॉफ्टवेयर से पूरी प्रक्रिया
पेपरलेस निबंधन की पूरी व्यवस्था ई-निबंधन सॉफ्टवेयर पर आधारित है। इसमें दस्तावेज तैयार करने से लेकर शुल्क की गणना और भुगतान तक की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी की जा सकती है।
इस व्यवस्था में कई सुविधाएं एक साथ जोड़ी गई हैं:
- दस्तावेज तैयार करने की डिजिटल सुविधा
- शुल्क की कंप्यूटर से स्वचालित गणना
- ई-चालान की सुविधा
- ई-स्टांप की व्यवस्था
- आधार आधारित ई-साइन
- डिजिटल माध्यम से निबंधन प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा
इन सुविधाओं की वजह से आवेदकों को पहले की तुलना में कम कागजी कार्रवाई करनी पड़ रही है।
घर बैठे या सुविधा केंद्र से कर सकते हैं प्रक्रिया
डिजिटल निबंधन व्यवस्था का एक अहम पहलू यह है कि आवेदक प्रक्रिया के कई चरण घर बैठे पूरे कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी सुविधा केंद्र के माध्यम से भी डिजिटल प्रक्रिया का लाभ लिया जा सकता है। इससे निबंधन कार्यालयों में अनावश्यक आवाजाही कम होने की उम्मीद है। साथ ही दस्तावेज, शुल्क और हस्ताक्षर से जुड़ी प्रक्रिया डिजिटल होने से रिकॉर्ड तैयार करने और उसे सुरक्षित रखने में भी सुविधा मिलती है।
पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
विभाग के अनुसार, पेपरलेस निबंधन से समय की बचत के साथ प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। शुल्क की स्वचालित गणना, ई-चालान और ई-स्टांप जैसी सुविधाएं पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ती हैं। हालांकि, राज्यभर में दस्तावेज तैयार करने वालों की ओर से इस व्यवस्था को लेकर विरोध भी सामने आया है। इसके बावजूद विभाग के आंकड़ों में पेपरलेस निबंधन की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है संख्या
जुलाई से शुरू हुई व्यवस्था में पहले महीने के करीब 1200 निबंधनों से लेकर सितंबर के महज 15 दिनों में करीब 12 हजार दस्तावेज तक पहुंचना डिजिटल निबंधन के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाता है। विभाग अब प्रतिदिन 1500 से अधिक दस्तावेज निबंधित करने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


