Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट में नाबालिग को जेल भेजे जाने के मामले में 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। अनीता देवी की ओर से दाखिल इस याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखने के तरीके पर नाराजगी जताई। कोर्ट के आदेश पर राज्य के मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। अदालत ने सरकार और उसके अधिवक्ताओं के बीच समन्वय की कमी पर सवाल उठाए। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
सरकार और अधिवक्ताओं के बीच समन्वय पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मामले में पक्ष रखने के तरीके पर असंतोष जाहिर किया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी अधिवक्ता मामले में सही ढंग से अपना पक्ष नहीं रख पा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि सरकार और उसके वकीलों के बीच समन्वय का अभाव दिखाई दे रहा है। इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने और व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है। अदालत की टिप्पणी के बाद मुख्य सचिव ने व्यवस्था को बेहतर बनाने और समन्वय से जुड़ी समस्या दूर करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तारीख तय की। साथ ही अगली सुनवाई में मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दे दी।
नाबालिग को जेल भेजने से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला रांची के सदर थाना क्षेत्र में हुई छिनतई की घटना से संबंधित है। याचिका के अनुसार, इस मामले में अनीता देवी के 16 वर्षीय बेटे को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर उसकी उम्र नाबालिग होने की बात सामने आई। इसके बाद निचली अदालत के आदेश पर उसे डुमरदगा स्थित बाल सुधार गृह भेज दिया गया। इस घटनाक्रम को लेकर अनीता देवी ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपने बेटे को जेल भेजे जाने के मामले में राज्य सरकार से 20 लाख रुपये मुआवजा दिलाने की मांग की है।
अनीता देवी ने सरकार से मांगा 20 लाख रुपये मुआवजा
याचिकाकर्ता अनीता देवी की ओर से अधिवक्ता वेंकटेश कुमार ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार इस मामले में अपना पक्ष रखने से बच रही है। याचिका का मुख्य मुद्दा यह है कि नाबालिग उम्र होने के बावजूद किशोर को जेल भेजे जाने की कार्रवाई के लिए क्या राज्य सरकार को मुआवजा देना चाहिए। इस पर अदालत में आगे सुनवाई होनी है। हालांकि, अभी तक अदालत की ओर से 20 लाख रुपये के मुआवजे पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है। मामले में सरकार का पक्ष और संबंधित तथ्यों पर विचार के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की है। मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मिलने के बाद अब मामले में सरकार के पक्ष और अदालत के निर्देशों पर नजर रहेगी। यह मामला नाबालिगों से संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सरकारी तंत्र के समन्वय जैसे महत्वपूर्ण सवालों से जुड़ा है। फिलहाल, मुआवजे की मांग पर अंतिम निर्णय आना बाकी है।
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